अभाविप के आंदोलन का असर, डीयू में 7 से 9 अक्टूबर तक फिर खुलेगी माइग्रेशन विंडो

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अभाविप के आंदोलन का असर, डीयू में 7 से 9 अक्टूबर तक फिर खुलेगी माइग्रेशन विंडो


नई दिल्ली, 07 अक्टूबर (हि.स.)। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) दिल्ली द्वारा दिल्ली विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों की माइग्रेशन संबंधी समस्या को लेकर लगातार उठाई जा रही मांग के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने माइग्रेशन विंडो को पुनः खोलने का निर्णय लिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन के निर्णय के अनुसार विद्यार्थी 7 से 9 अक्टूबर तक माइग्रेशन प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे।

अभाविप समर्थित दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ के निर्वाचित प्रतिनिधि पिछले कई दिनों से डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर एवं विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष माइग्रेशन विंडो को पुनः खोलने और इसकी अवधि बढ़ाने की मांग कर रहे थे। परीक्षा परिणाम में देरी के कारण बड़ी संख्या में विद्यार्थी निर्धारित समय-सीमा के भीतर माइग्रेशन प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए थे। इससे विद्यार्थियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।

विद्यार्थियों की समस्या को देखते हुए डूसू के प्रतिनिधियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष लगातार अपनी मांग रखी। मांग पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के बाद 6 अक्टूबर को अभाविप कार्यकर्ताओं एवं विद्यार्थियों ने रजिस्ट्रार कार्यालय में आंदोलन किया और प्रशासन के समक्ष माइग्रेशन विंडो को दोबारा खोलने की मांग मजबूती से रखी।

आंदोलन के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने विद्यार्थियों के हित में माइग्रेशन विंडो को 7 अक्टूबर से 9 अक्टूबर तक तीन दिनों के लिए पुनः खोलने का निर्णय लिया है। अभाविप ने विश्वविद्यालय प्रशासन के इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे विद्यार्थियों की आवाज और संघर्ष की जीत बताया है।

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष यश ने कहा कि विद्यार्थियों की समस्याओं को लेकर डूसू लगातार विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष अपनी बात रखता रहा है। माइग्रेशन की समय-सीमा समाप्त होने के बाद बड़ी संख्या में विद्यार्थी प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए थे। विद्यार्थियों की इस समस्या को देखते हुए प्रशासन से माइग्रेशन विंडो पुनः खोलने और अतिरिक्त समय देने की मांग की गई थी। 6 अक्टूबर के आंदोलन के बाद 7 से 9 अक्टूबर तक माइग्रेशन विंडो पुनः खोलने का निर्णय विद्यार्थियों के हित में महत्वपूर्ण कदम है।

अभाविप दिल्ली मंत्री सार्थक शर्मा ने कहा कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद हमेशा विद्यार्थियों के हितों और अधिकारों के लिए संघर्ष करती रही है। माइग्रेशन विंडो को पुनः खोलने की मांग भी विद्यार्थियों की वास्तविक समस्या को ध्यान में रखते हुए लगातार प्रशासन के समक्ष रखी गई। मांग पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के बाद 6 अक्टूबर को अभाविप कार्यकर्ताओं एवं विद्यार्थियों ने रजिस्ट्रार कार्यालय में आंदोलन किया। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा 7 से 9 अक्टूबर तक माइग्रेशन विंडो पुनः खोलने का निर्णय स्वागत योग्य है।

अभाविप ने सभी संबंधित विद्यार्थियों से अपील की है कि वे 7 से 9 अक्टूबर के बीच माइग्रेशन प्रक्रिया पूरी कर इस अवसर का लाभ उठाएं। संगठन ने कहा कि विद्यार्थियों से जुड़े किसी भी मुद्दे पर वह उनके साथ खड़ा रहेगा और आवश्यकता पड़ने पर प्रशासन के समक्ष मजबूती से उनकी आवाज उठाता रहेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी

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