अनुशासन और राष्ट्रीय दायित्व की भावना ही व्यक्ति की सफलता को निर्धारित करती है : विजेंद्र गुप्ता

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अनुशासन और राष्ट्रीय दायित्व की भावना ही व्यक्ति की सफलता को निर्धारित करती है : विजेंद्र गुप्ता


नई दिल्ली, 15 अप्रैल (हि.स.)। दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता बुधवार को मथुरा रोड स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल में आयोजित वार्षिक पुरस्कार समारोह में मुख्य अतिथि शामिल हुए। उन्होंने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि अंक अवसरों के द्वार खोल सकते हैं, परंतु अनुशासन, विवेक और राष्ट्रीय दायित्व की भावना ही व्यक्ति की दूरी और सफलता को निर्धारित करता है।

विजेंद्र गुप्ता कहा कि यह अवसर केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता का ही नहीं, बल्कि उस निरंतरता, परिश्रम और समर्पण का भी सम्मान है, जो सफलता को स्थायी बनाते हैं। उन्होंने कहा कि उपलब्धि तभी सार्थक होती है जब वह उद्देश्य और चरित्र से जुड़ी हो।

दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि शिक्षण संस्थान ऐसे व्यक्तित्वों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जो आगे चलकर सार्वजनिक जीवन, प्रशासन और बौद्धिक क्षेत्रों में सार्थक योगदान देते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा का वास्तविक अर्थ व्यक्ति के विवेक को विकसित करना और उसे समाज के प्रति जिम्मेदार बनाना है। विद्यालयों को शैक्षणिक के साथ-साथ चरित्र निर्माण और नेतृत्व विकास पर भी समान रूप से ध्यान देना चाहिए।

डॉ. भीमराव अंबेडकर का उदाहरण देते हुए गुप्ता ने कहा कि शिक्षा सदैव सामाजिक परिवर्तन और संवैधानिक दृष्टि का सशक्त माध्यम रही है। उन्होंने विशेष रूप से छात्राओं में नेतृत्व क्षमता और भागीदारी को प्रोत्साहित करने पर बल दिया और कहा कि इससे न केवल आत्मविश्वास बढ़ता है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था भी सुदृढ़ होती है।

समकालीन मुद्दों का उल्लेख करते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने ‘ब्रेन ड्रेन’ पर संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि वैश्विक अवसर महत्वपूर्ण हैं, परंतु देश की दीर्घकालिक शक्ति इस बात पर निर्भर करती है कि युवा अपनी प्रतिभा का उपयोग देश के भीतर किस प्रकार करते हैं। ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इसके लिए केवल कुशल ही नहीं, बल्कि जिम्मेदार और सजग नागरिकों की आवश्यकता है।

गुप्ता ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने मूल्यों से जुड़े रहें और समाज के प्रति सार्थक योगदान देने का संकल्प लें। इस अवसर पर उन्होंने “शताब्दी यात्रा: वीर विठ्ठलभाई की गौरव गाथा” शीर्षक कॉफी टेबल बुक विद्यालय के पुस्तकालय में रखने के लिए भेंट की, जो भारत की संसदीय विरासत और श्री विठ्ठलभाई पटेल के स्थायी योगदान को दर्शाती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव

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