दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष ने ओम बिरला को लिखा पत्र, संसदीय संस्थानों के सम्मान का किया आग्रह

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दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष ने ओम बिरला को लिखा पत्र, संसदीय संस्थानों के सम्मान का किया आग्रह


नई दिल्ली, 16 मार्च (हि.स.)। दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने सोमवार को लोक सभा के अध्यक्ष ओम बिरला को एक पत्र लिखकर, विपक्षी दलों द्वारा लोक सभा में अध्यक्ष को हटाने के लिए लाए गए प्रस्ताव पर गहरी चिंता व्यक्त की। गुप्ता ने कहा कि यह अत्यंत दुखद है कि कुछ विपक्षी दलों ने संकीर्ण राजनीतिक हितों से प्रेरित होकर वर्तमान अध्यक्ष के विरुद्ध प्रस्ताव लाने का मार्ग चुना, जबकि यह कार्यालय दलीय राजनीति से ऊपर है और इसे संसद के नियमों, परंपराओं और गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

विजेंद्र गुप्ता ने पत्र में इस बात पर जोर दिया कि भारत के संसदीय लोकतंत्र के कामकाज में अध्यक्ष का पद असाधारण महत्व रखता है। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष सदन की गरिमा के अभिरक्षक होते हैं। पीठासीन अधिकारी का अधिकार यह सुनिश्चित करता है कि संसदीय कार्यवाही व्यवस्थित और निष्पक्ष तरीके से संचालित हो। साथ ही यह राजनीतिक विचारधाराओं से ऊपर उठकर सभी सदस्यों के अधिकारों और विशेषाधिकारों की रक्षा भी करता है।

विधानसभा अध्यक्ष ने अपने पत्र में आगे कहा कि अध्यक्ष पद की शक्ति सदन के सामूहिक सम्मान और विश्वास से आती है। उन्होंने टिप्पणी की कि संसदीय संस्थानों की निरंतर विश्वसनीयता इसी गरिमा, तटस्थता और अधिकार को बनाए रखने पर निर्भर करती है।

गुप्ता ने कहा कि यदि संकीर्ण राजनीतिक उद्देश्यों के लिए अध्यक्ष के विरुद्ध प्रस्ताव लाए जाते हैं, तो इससे संसदीय प्रणाली की मूल भावना को नुकसान पहुंचने का जोखिम बना रहता है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक शासन को बनाए रखने वाली संस्थाओं के प्रति संयम और जिम्मेदारी का भाव रखना चाहिए, ताकि संसदीय स्थिरता और लोकतांत्रिक मर्यादा बनी रहे।

गुप्ता ने उन सांसदों की भी सराहना की जिन्होंने इस प्रयास के विरुद्ध दृढ़ता से खड़े होकर संसदीय परंपराओं की पवित्रता बनाए रखने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।

अंत में गुप्ता ने कहा कि ओम बिरला के नेतृत्व में लोक सभा ने संतुलन और गरिमा के साथ कार्य करना जारी रखा है, जिससे अनुशासन और शिष्टाचार के साथ सार्थक लोकतांत्रिक बहस संभव हुई है। उन्होंने लोक सभा अध्यक्ष के प्रति अपना सम्मान व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई दी और विश्वास जताया कि यह संस्थान भविष्य में भी संसदीय लोकतंत्र की उच्चतम परंपराओं को अक्षुण्ण रखेगा।

उल्लेखनीय है कि इस प्रस्ताव को सदन में ध्वनि मत से खारिज कर दिया गया, जिससे पीठासीन अधिकारी के अधिकार और निष्पक्ष कार्यप्रणाली में सदन के विश्वास की पुनः पुष्टि हुई है।

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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी

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