विपक्ष के बहिष्कार के बीच सदन ने 15 घंटे 16 मिनट तक किया कामकाज : विजेंद्र गुप्ता

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विपक्ष के बहिष्कार के बीच सदन ने 15 घंटे 16 मिनट तक किया कामकाज : विजेंद्र गुप्ता


नई दिल्ली, 30 मार्च (हि.स.)। दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने आठवीं विधान सभा के चौथे सत्र के दूसरे भाग के समापन पर जानकारी देते हुए कहा कि 23 मार्च से 27 मार्च तक चले इस सत्र में कुल चार बैठकें हुईं। विपक्ष के बहिष्कार के बीच सदन ने कुल 15 घंटे और 16 मिनट तक कार्य किया, जो केंद्रित, व्यवस्थित और परिणाम-केंद्रीत विधायी कार्य को दर्शाता है। उन्होंने विधानसभा परिसर में सोमवार को प्रेस कांफ्रेंस करते यह जानकारी दी।

विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि इस सत्र के दौरान विपक्ष ने पूरी तरह से नकारात्मक दृष्टिकोण अपनाया है, बिना किसी मुद्दे के सदन का बहिष्कार करना, उसके कामकाज में बाधा डालना और जनता को गुमराह करने की कोशिश करना उचित नहीं ठहराया जा सकता है।

विजेंद्र गुप्ता ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि पर प्रकाश डालते हुए बताया कि कैग की सभी 7 लंबित रिपोर्टों को सदन के पटल पर रख दिया गया है और अब कोई भी रिपोर्ट लंबित नहीं है। इन रिपोर्टों को लोक लेखा समिति को सौंप दिया गया है। राज्य वित्त, राजस्व, आर्थिक, सामाजिक और सामान्य क्षेत्रों के साथ-साथ दिल्ली जल बोर्ड और विश्वविद्यालयों से संबंधित ऑडिट रिपोर्ट 23 मार्च को पेश की गईं और 25 व 27 मार्च को उन पर चर्चा हुई। गुप्ता ने कहा कि 15 वर्षों में पहली बार लोक लेखा समिति की तीन रिपोर्टों ने पूर्ण प्रक्रियात्मक चक्र पूरा किया है, जिससे अब सरकार पर उन पर कार्रवाई करने की जिम्मेदारी तय हुई है।

सत्र के दौरान हुए विधायी कार्यों का विवरण देते हुए अध्यक्ष ने बताया कि 23 मार्च 2026 को दिल्ली का आर्थिक सर्वेक्षण (2025-26) प्रस्तुत किया गया। 24 मार्च 2026 को वर्ष 2026-27 का वार्षिक बजट पेश किया गया और 27 मार्च 2026 को बजट को सदन में हुई चर्चा के बाद अपनाया गया। साथ ही, दिल्ली विनियोग (संख्या 2) विधेयक 2026, सोसाइटी पंजीकरण (दिल्ली संशोधन) विधेयक 2026 और दिल्ली विनियोग (संख्या 3) विधेयक 2026 जैसे महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए गए।

गुप्ता ने अत्याधुनिक तकनीक के उपयोग पर जानकारी देते हुए “विधान साथी” एआई चैटबॉट के सफल लॉन्च की सराहना की। यह चैटबॉट हिंदी और अंग्रेजी में वास्तविक समय में विधायी अनुसंधान सहायता और वॉयस-इनेबल्ड एक्सेस प्रदान करता है, जिससे विधायी कामकाज का आधुनिकीकरण हुआ।

विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि नियम 280 के तहत 63 नोटिस प्राप्त हुए थे, जिनमें से 44 विशेष उल्लेख सदन में उठाए गए। ये मामले जनता की विभिन्न समस्याओं से संबंधित थे और इन्हें संबंधित अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश के साथ भेज दिया गया है। इसके अतिरिक्त, सदन की वित्तीय समितियों (लोक लेखा समिति, प्राक्कलन समिति और सरकारी उपक्रमों संबंधी समिति) का गठन बिना चुनाव के नौ-नौ सदस्यों के साथ किया गया, जिससे संसदीय निगरानी में निरंतरता सुनिश्चित हुई है।

गुप्ता ने दोहराया कि सदन पूरी तरह से अपनी रूल बुक के अनुसार कार्य करता है। उन्होंने कहा कि भ्रम पैदा करना और कार्यवाही से सामूहिक रूप से दूर रहना जिम्मेदारी की कमी को दर्शाता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव

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