दीनदयाल उपाध्याय की पुस्तकों को पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग, चरित्र-निर्माण और राष्ट्रबोध पर जोर

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दीनदयाल उपाध्याय की पुस्तकों को पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग, चरित्र-निर्माण और राष्ट्रबोध पर जोर


दीनदयाल उपाध्याय की पुस्तकों को पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग, चरित्र-निर्माण और राष्ट्रबोध पर जोर


नई दिल्ली, 26 सितंबर (हि.स.)।सुपरिचित साहित्यकार डॉ. ओम प्रकाश झा ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय द्वारा लिखित ‘जगद्गुरु श्रीशंकराचार्य’ और ‘सम्राट चन्द्रगुप्त’ पुस्तकों को उत्कृष्ट ऐतिहासिक रचनाएं बताते हुए इन्हें शैक्षिक पाठ्यक्रमों में शामिल करने की मांग की। उन्होंने कहा कि दोनों पुस्तकें आकार में छोटी हैं, लेकिन इनमें राष्ट्र की एकता, चरित्र-निर्माण, राष्ट्रबोध और नैतिक मूल्यों का महत्वपूर्ण संदेश है।

वे शनिवार को नई दिल्ली में अखिल भारतीय साहित्य परिषद् से संबद्ध इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती की ओर से आयोजित पुस्तक चर्चा में बोल रहे थे। चर्चा पंडित दीनदयाल उपाध्याय द्वारा लिखित दोनों पुस्तकों पर केंद्रित थी।

डॉ. झा ने कहा कि ‘जगद्गुरु श्रीशंकराचार्य’ महान दार्शनिक आदिशंकराचार्य के प्रेरक जीवन पर आधारित है। उन्होंने कहा कि देश की विविधता में एकता स्थापित करने के लिए शंकराचार्य ने भारत के चारों कोनों में चार प्रसिद्ध मठों की स्थापना की। जब देश राजनीतिक रूप से बिखरा हुआ था, तब शंकराचार्य ने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के माध्यम से पूरे भारत को जोड़ने का प्रयास किया।

उन्होंने कहा कि ‘सम्राट चन्द्रगुप्त’ में चाणक्य के कुशल मार्गदर्शन और चन्द्रगुप्त के अटूट राष्ट्रप्रेम को दर्शाया गया है। दोनों पुस्तकों के माध्यम से विद्यार्थियों में राष्ट्रबोध और नैतिक मूल्यों को मजबूत किया जा सकता है।

सुपरिचित लेखक चन्दन कुमार ने कहा कि ‘जगद्गुरु श्रीशंकराचार्य’ समाज को एक सूत्र में पिरोने का शाश्वत और जीवंत दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि ‘सम्राट चन्द्रगुप्त’ में चाणक्य चन्द्रगुप्त से स्पष्ट कहते हैं कि राष्ट्रहित के सामने राजा का कोई मूल्य नहीं है। राजा राष्ट्र के लिए होता है, राष्ट्र राजा के लिए नहीं। उन्होंने कहा कि दीनदयाल उपाध्याय ने दोनों पुस्तकों में राष्ट्र को सशक्त बनाने पर बल दिया है।

पुस्तक चर्चा का संचालन इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती के मध्य क्षेत्र साहित्य केंद्र के संयोजक वरुण कुमार ने किया। कार्यक्रम में अखिल भारतीय साहित्य परिषद् के केंद्रीय कार्यालय सचिव संजीव सिन्हा, विकास आनंद, संदीप द्विवेदी, शिवनारायण और इन्दल कुमार ने सहभागिता की।

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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी

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