पर्यावरण हितैषी एवं महिला सशक्तिकरण को मजबूती देने वाला है बजट : सिरसा

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पर्यावरण हितैषी एवं महिला सशक्तिकरण को मजबूती देने वाला है बजट : सिरसा


- महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए 1,000 नए ई-ऑटो के लाइसेंस दिए जाएंगे- सरकार 300 करोड़ की “प्रदूषण नियंत्रण और आपात उपाय” योजना लाएगी

नई दिल्ली, 24 मार्च (हि.स.)। दिल्ली के कैबिनेट मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने आज दिल्ली विधानसभा में पेश हुए 2026-27 के बजट को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि यह दिल्ली के विकास और पर्यावरण संरक्षण के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

पर्यावरण के प्रति प्रतिबद्धता जाहिर करते हुए सिरसा ने कहा कि दिल्ली के जो भी प्रोजेक्ट्स आ रहे हैं, उनको पौधरोपण के साथ जोड़कर पर्यावरण हितैषी बनाया जाएगा। बजट में कुल 21 फीसदी हिस्सा हरित पहलों के लिए आवंटित किया गया है, जो प्रदूषण नियंत्रण और सस्टेनेबल विकास को बढ़ावा देगा।

महिला सशक्तिकरण के संदर्भ में उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से 1,000 नए ई-ऑटो के लाइसेंस महिलाओं को दिए जाएंगे, जिससे उन्हें सुरक्षित और सम्मानजनक आजीविका के अवसर प्राप्त होंगे। इसके साथ ही, स्कूलों और कॉलेजों में वेंडिंग मशीनों के माध्यम से ढाई करोड़ सेनेटरी पैड्स उपलब्ध कराने की पहल को उन्होंने महिला स्वास्थ्य, गरिमा और सुरक्षा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि ये पहलें महिलाओं की भागीदारी को सार्वजनिक जीवन और कार्यबल में बढ़ाने की दिशा में निर्णायक साबित होंगी।

रोजगार और गिग इकॉनमी के संदर्भ में उन्होंने बताया कि सरकार गिग वर्कर्स के लिए बेहतर कार्य-परिस्थितियाँ सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। अटल कैंटीनों के माध्यम से उनके लिए विश्राम, भोजन और चार्जिंग जैसी सुविधाओं की व्यवस्था की जा रही है। साथ ही, ऑटो और टैक्सी चालकों तथा गिग वर्कर्स के लिए समर्पित बोर्ड गठित करने का प्रस्ताव भी रखा गया है, जिससे उनकी समस्याओं के समाधान और कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में मदद मिलेगी।

मंत्री ने विपक्ष की आलोचना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह खेदजनक है कि विपक्ष इस बजट की सकारात्मकता और दूरगामी प्रभाव को स्वीकार नहीं कर पा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली की लगभग 75 प्रतिशत बजट आवश्यकताएं स्वयं के राजस्व संग्रह से पूरी होती हैं, जो वित्तीय प्रबंधन की मजबूती को दर्शाता है। साथ ही, जीएसडीपी और प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह बजट न केवल सामाजिक न्याय बल्कि आर्थिक स्थिरता और विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को भी स्पष्ट करता है।

बजट 2026-27 में किए गए इंडस्ट्री और स्टार्टअप से जुड़े प्रावधान : स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज की प्रतिस्पर्धा और उत्पादकता बढ़ाने के लिए कॉमन फैसिलिटी सेंटर्स के निर्माण के लिए 48 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित है। सरकार एक नई वेयरहाउसिंग पॉलिसी लेकर आ रही है, जिसके लिए 10 करोड़ का प्रावधान किया गया है। केंद्र सरकार के सहयोग से दिल्ली में पहली बार रैम्प (रेज़िंग एंड एक्सेलरेटिंग एमएसएमई परफॉर्मेंस) योजना लागू की जा रही है। इस योजना के तहत 32,000 एमएसएमई को प्रशिक्षण दिया जाएगा और 15,000 व्यवसायों को जीईएम और ओएनडीसी जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा। सरकार दिल्ली में एक मजबूत सेमीकंडक्टर निर्माण और अनुसंधान एवं विकास तंत्र स्थापित करने के लिए दिल्ली सेमीकंडक्टर पॉलिसी लेकर आएगी, जो इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 के अनुरूप होगी। सरकार दिल्ली ड्रोन पॉलिसी भी लाने जा रही है, जिसके माध्यम से दिल्ली को उन्नत तकनीक, अनुसंधान और हाई-टेक निर्माण के क्षेत्र में एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।

सिरसा ने कहा कि कुल बजटीय आवंटन का 21.44 फीसद, यानी 22,236 करोड़ रुपये इस वर्ष के हरित बजट का हिस्सा है। पर्यावरण और वन क्षेत्र के लिए कुल बजट प्रावधान को पिछले वर्ष के 505 करोड़ से बढ़ाकर इस वर्ष 822 करोड़ किया गया है। सरकार 300 करोड़ की “प्रदूषण नियंत्रण और आपात उपाय” योजना लेकर आ रही है। उन्होंने कहा कि एमसीडी को प्रदूषण नियंत्रण के लिए 204 करोड़ आवंटित किए गए हैं। निगरानी प्रणाली के लिए 2 करोड़ (आईसीसीसी, वॉर रूम, मोबाइल ऐप, रियल-टाइम ट्रैकिंग) का प्रावधान है। सरकार वर्ल्ड बैंक के सहयोग से उन्नत तकनीकी समाधान और निगरानी प्रणाली लाने की दिशा में भी काम कर रही है।

सिरसा ने कहा कि सरकार कचरा प्रसंस्करण क्षमता को 7,000 मीट्रिक टन से बढ़ाकर 15,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन करने की दिशा में काम कर रही है। इसके लिए नरेला, ओखला, गाजीपुर और तहखंड में वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट के विस्तार का प्रावधान किया गया है। दिल्ली में प्रतिदिन उत्पन्न होने वाले लगभग 1,500 टन गोबर कचरे को प्रसंस्करण के माध्यम से ऊर्जा उत्पादन में बदला जाएगा। इससे प्रदूषण कम होगा, ईंधन आयात घटेगा और दिल्ली एक सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल के रूप में उभरेगी।

उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार कार्बन क्रेडिट मुद्रीकरण योजना को आगे बढ़ा रही है। यह योजना उत्सर्जन में कमी को आर्थिक मूल्य में बदलेगी। एक मजबूत एमआरवी प्रणाली (मापन, रिपोर्टिंग और सत्यापन) के माध्यम से। इससे नवाचार को बढ़ावा मिलेगा और दिल्ली में सतत विकास को गति मिलेगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव

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