दिल्ली में बढ़ाई गई रैन बसेरों की संख्या और सुविधाएं
नई दिल्ली, 15 जनवरी (हि.स.)। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के निर्देशों का पालन करते हुए दिल्ली सरकार ने कड़ाके की ठंड में बेघर लोगों को सुरक्षित रखने के लिए अपने आश्रय अभियान को और तेज कर दिया है। एम्स, सफदरजंग और जीबी पंत जैसे अस्पतालों के बाहर बेसहारा लोगों को तुरंत मदद पहुंचाई जा रही है। इन इलाकों में रैन बसेरे की संख्या में भी इजाफा किया गया है। साथ ही दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डूसिब) और शेल्टर मैनेजमेंट एजेंसियां खुले में सो रहे लोगों को लगातार रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रही हैं। रैन बसेरों में लोगों के रहने के लिए बिस्तर, तीन समय का खाना, साफ-सफाई और पीने के पानी जैसी जरूरी सुविधाएं मुफ्त दी जा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने गुरुवार को एक विज्ञप्ति जारी कर बताया कि विंटर एक्शन प्लान 2025-26 के तहत ठंड से बचाव के लिए राजधानी के संवेदनशील और अधिक भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों में लगभग 250 अस्थायी ‘पगोडा’ रैन बसेरे भी स्थापित किए गए हैं। साथ ही डूसिब द्वारा वर्तमान में पूरी दिल्ली में 197 स्थायी रैन बसेरे दिन-रात चलाए जा रहे हैं, जिनमें सभी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि एम्स-सफदरजंग क्षेत्र में पहले से मौजूद 320 बेड वाले 32 पगोडा रैन बसेरों के अलावा 3 नए पगोडा रैन बसेरे और लगाए गए हैं। इससे इस इलाके में रैन बसेरों की कुल क्षमता बढ़कर 350 बेड हो गई है। उन्होंने बताया कि एम्स और सफदरजंग अस्पताल के आसपास बेघर लोगों की अधिक संख्या को देखते हुए वहां के सबवे क्षेत्र में भी अस्थायी शरण की व्यवस्था की गई। जरूरतमंद लोगों को तुरंत कंबल और बिस्तर उपलब्ध करा जा रहे हैं ताकि उन्हें ठंड से बचाया जा सके। विशेष अभियान के तहत एम्स-सफदरजंग क्षेत्र से लगभग 75 बेघर लोगों को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। इसके बाद इस क्षेत्र को खुले में सोने वाले लोगों से मुक्त किया गया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि जीबी पंत अस्पताल के आसपास भी 8 अस्थायी ‘पगोडा’ रैन बसेरे स्थापित किए गए हैं। इनमें 80 लोगों के ठहरने की व्यवस्था की गई है। रैन बसेरों का संचालन कर रही एजेंसियां प्रतिदिन रात 10 बजे से सुबह 4 बजे तक नियमित निरीक्षण कर रही हैं, ताकि खुले और असुरक्षित स्थानों पर सो रहे बेघर लोगों को समय रहते रैन बसेरों तक पहुंचाया जा सके। साथ ही एक केंद्रीय नियंत्रण कक्ष भी चौबीसों घंटे काम कर रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव

