दिल्ली में शहर के बाहरी क्षेत्रों में विकसित होंगे लॉजिस्टिक्स केंद्र, शहर की भीड़भाड़, प्रदूषण में आएगी कमी
नई दिल्ली, 13 मई (हि.स.)। दिल्ली सरकार लॉजिस्टिक्स एवं वेयरहाउसिंग नीति को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है। यह नीति राजधानी में माल ढुलाई एवं आपूर्ति प्रणाली को अधिक कुशल, तेज और कम लागत वाला बनाने के साथ-साथ व्यापार को आसान बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
नीति का मुख्य उद्देश्य दिल्ली में माल परिवहन से होने वाली भीड़भाड़ को कम करना, प्रदूषण घटाना और राजधानी को एक आधुनिक, कुशल और पर्यावरण अनुकूल लॉजिस्टिक्स हब के रूप में विकसित करना है।
नीति के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित प्लानिंग, रियल-टाइम ट्रैकिंग और डिजिटल फ्रेट मैनेजमेंट सिस्टम लागू किए जाएंगे। इससे माल ढुलाई की योजना, रूट ऑप्टिमाइजेशन और डिलीवरी शेड्यूलिंग अधिक सटीक और कुशल बनेगी, जिससे लागत में कमी और समय की बचत होगी।
मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार नीति के तहत शहर के बाहर परिधीय क्षेत्रों में शहरी समेकन एवं लॉजिस्टिक्स वितरण केंद्र (यूसीएलडीसी) विकसित किए जाएंगे, जहां बड़े स्तर पर आने वाले माल को एक स्थान पर एकत्र कर आवश्यकता के अनुसार शहर के भीतर भेजा जाएगा। साथ ही बाजार स्तर के गोदाम और सूक्ष्म पूर्ति केंद्र विकसित किए जाएंगे, जिससे सामान की अंतिम चरण तक डिलीवरी तेज और व्यवस्थित होगी।
अंतर्देशीय कंटेनर डिपो (आईसीडी) का आधुनिकीकरण किया जाएगा तथा लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर, ट्रक टर्मिनल और पार्किंग हब विकसित किए जाएंगे। मंडियों के पास कोल्ड स्टोरेज बनाए जाएंगे, जिससे भंडारण और परिवहन व्यवस्था मजबूत होगी और शहर के भीतर ट्रैफिक दबाव कम होगा।
नीति में पर्यावरण संरक्षण को विशेष प्राथमिकता दी गई है। इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा और अंतिम चरण तक सामान पहुंचाने की व्यवस्था को स्वच्छ बनाया जाएगा। सौर ऊर्जा आधारित वेयरहाउसिंग और ऊर्जा दक्ष ढांचे को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।
एकीकृत लॉजिस्टिक्स इंटरफेस प्लेटफॉर्म (यूएलआईपी) के माध्यम से माल की आवाजाही की वास्तविक समय पर निगरानी और बेहतर प्रबंधन संभव होगा। आधुनिक तकनीकों के उपयोग से माल ढुलाई और डिलीवरी प्रणाली अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगी।
इस नीति से ई-कॉमर्स, वस्त्र, निर्माण सामग्री, फल एवं सब्जियां और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों को बड़ा लाभ मिलेगा। बेहतर भंडारण और वितरण व्यवस्था से उद्योगों की उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी। साथ ही, तीसरा पक्ष लॉजिस्टिक्स सेवाओं (3पीएल) को भी मजबूती मिलेगी। वर्तमान में लगभग 61 प्रतिशत वेयरहाउसिंग की मांग ई-कॉमर्स क्षेत्र से आती है, जिसे ध्यान में रखते हुए यह नीति आधुनिक पूर्ति अवसंरचना में बड़े निवेश को आकर्षित करेगी।
इस नीति से वेयरहाउसिंग, परिवहन, लॉजिस्टिक्स पार्क और कोल्ड चेन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे। साथ ही पैकेजिंग, आईटी आधारित सेवाओं और अन्य सहायक क्षेत्रों में भी रोजगार बढ़ेगा। सरकार द्वारा कौशल विकास के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएंगे, जिनमें प्रति कर्मचारी 5,000 रुपये तक की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी, जिससे एक प्रशिक्षित कार्यबल तैयार होगा।
लॉजिस्टिक्स अवसंरचना के विकास पर 50 प्रतिशत तक की पूंजी सब्सिडी (अधिकतम 50 करोड़ रुपये) दी जाएगी। साथ ही ब्याज सब्सिडी और बिजली शुल्क में राहत से लागत कम होगी। सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के माध्यम से लॉजिस्टिक्स परियोजनाओं में निजी निवेश को बढ़ावा दिया जाएगा।
नीति के तहत सिंगल विंडो प्रणाली को मजबूत किया जाएगा, जिससे सभी अनुमतियां एक ही मंच पर उपलब्ध होंगी। वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों को 24×7 संचालित करने की सुविधा दी जाएगी तथा लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाएगा।
‘मास्टर प्लान दिल्ली 2041’ के तहत थोक बाजारों को चरणबद्ध तरीके से शहर के बाहर स्थानांतरित किया जाएगा तथा लॉजिस्टिक्स हब के लिए भूमि की शीघ्र पहचान और आवंटन सुनिश्चित किया जाएगा।
यह नीति दिल्ली के लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में व्यापक सुधार लाएगी। इससे आपूर्ति शृंखला मजबूत होगी, उद्योगों को गति मिलेगी, रोजगार बढ़ेगा और निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। यह नीति दिल्ली की लॉजिस्टिक्स दक्षता को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप मजबूत करेगी और राज्यों की लॉजिस्टिक्स परफॉर्मेंस मापने वाली एलईएडीएस (लीड्स) रैंकिंग में सुधार लाने में सहायक होगी। बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, पारदर्शी प्रक्रियाओं और डिजिटल एकीकरण के माध्यम से ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को नई गति मिलेगी, जिससे निवेशकों के लिए दिल्ली अधिक आकर्षक गंतव्य बनेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह नीति दिल्ली को एक आधुनिक, कुशल और पर्यावरण अनुकूल लॉजिस्टिक्स हब के रूप में स्थापित करेगी।
--------------
हिन्दुस्थान समाचार / अनूप शर्मा

