साइबर ठगी के मामले में तीन गिरफ्तार
नई दिल्ली, 02 अक्टूबर (हि.स.)। कूरियर डिलीवरी का पता अपडेट करने के नाम पर मोबाइल में एपीके फाइल भेजकर बैंक खाते खाली करने वाला जामताड़ा-मेवात नेटवर्क साइबर ठगी की रकम को फ्यूल कार्ड के जरिए निकाल रहा था। दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के साइबर थाना पुलिस ने गिरोह के तीन आरोपित शौकीन, नासिर हुसैन और आशीष आर्य को गिरफ्तार किया है। आरोपित के पास से 113 से अधिक संदिग्ध फ्यूल कार्ड, पांच मोबाइल फोन और 12 सिम कार्ड मिले हैं। पुलिस को आशंका है कि गिरोह ने 150 से 200 तक फर्जी फ्यूल कार्ड तैयार कराए हैं। अब तक दस करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध लेनदेन की जांच की जा रही है।
पुलिस के मुताबिक गिरोह का सरगना नासिर हुसैन है। उसके खिलाफ दिल्ली, हरियाणा और महाराष्ट्र में भी मामले दर्ज होने की जानकारी मिली है। पुलिस अब दूसरे राज्यों में हुई शिकायतों, फर्जी फ्यूल कार्ड तैयार कराने और एपीके फाइल उपलब्ध कराने वाले लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
पुलिस उपायुक्त विनित कुमार ने बताया कि पीड़ित जितेंद्र कुमार गुप्ता ने शिकायत दी थी कि सात मई को व्हाट्सऐप पर कूरियर कंपनी के नाम से एक एपीके फाइल भेजी गई। डिलीवरी का पता अपडेट करने के बहाने फाइल खोलकर दो रुपये का भुगतान करने को कहा गया। इसके बाद पीड़ित ने एचडीएफसी नेट बैंकिंग की जानकारी दर्ज कर दी। कुछ ही देर में खाते से 1,99,009.44 और 1,98,009.44 रुपये के दो अनधिकृत लेनदेन हुए। कुल 3,97,018.88 रुपये निकल गए।
उन्होंने बताया कि लेनदेन की जांच में पता चला कि ठगी के करीब 3.97 लाख रुपये एचपीसीएल ड्राइव ट्रैक प्लस के एक फ्यूल कार्ड कस्टमर आईडी में रिचार्ज किए गए थे। इस आईडी से दो ट्रक जुड़े थे। संबंधित कार्डों से करीब 15 लाख रुपये के लेनदेन भी मिले। इसके बाद पुलिस ने मोबाइल नंबर, सिम जारी करने के रिकॉर्ड, प्वाइंट ऑफ सेल और फ्यूल कार्ड की वीडियो केवाईसी की जांच की। तकनीकी और मैनुअल जांच के बाद शौकीन और नासिर को 28 सितंबर को राजस्थान के खैरथल-तिजारा जिले के टपुकड़ा से गिरफ्तार किया गया।
जांच में सामने आया कि आरोपी ट्रक की बुकिंग कराने के बहाने ब्लैकबक प्लेटफॉर्म से ट्रक मालिकों के आरसी, आधार और पैन कार्ड की जानकारी जुटाते थे। आरोप है कि फोटो और पते में बदलाव कर इन दस्तावेजों के फर्जी संस्करण तैयार किए जाते थे। इनके आधार पर कथित तौर पर गलत तरीके से हासिल सिम कार्ड के जरिए फ्यूल कार्ड के लिए आवेदन किया जाता था।
पुलिस ने फ्यूल कार्ड की वीडियो केवाईसी करने वाले पूर्व रिटेल बिजनेस एग्जीक्यूटिव आशीष आर्य को भी गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उसने दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन किए बिना नामांकन किया। वीडियो केवाईसी के दौरान व्यक्ति की फोटो का दस्तावेज से मिलान किए बिना कार्ड जारी किए गए।
पुलिस उपायुक्त ने बताया कि आरोपी इन फ्यूल कार्ड से पेट्रोल पंपों पर भुगतान करते थे। कुछ पंप कर्मचारियों को भी कथित तौर पर नेटवर्क में शामिल किया गया था। ग्राहक से मिले नकद या ऑनलाइन भुगतान को फ्यूल कार्ड की रकम के बदले आरोपियों के खातों में भेजा जाता था। इस तरीके से साइबर ठगी की रकम को सीधे बैंक खाते में मंगाने के बजाय फ्यूल कार्ड के जरिए खपाने और निकाली जाती थी।
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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव

