स्कूलों में बच्चों को सुबह मिले पौष्टिक भोजन, सरकार करेगी सुनिश्चित : रेखा गुप्ता
नई दिल्ली, 28 फ़रवरी (हि.स.)। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आज अक्षय पात्र फाउंडेशन के ‘सुबह के पोषण कार्यक्रम’ के शुभारंभ के अवसर पर कहा कि दिल्ली में बच्चों के लिए सुबह के पोषण अभियान की शुरुआत की जा रही है। दिल्ली सरकार अक्षय पात्र फाउंडेशन के सहयोग से यह सुनिश्चित करेगी कि स्कूल पहुंचने पर बच्चों को सुबह पौष्टिक भोजन मिले। उन्होंने कहा कि बच्चे सक्रिय और ऊर्जावान रहें ताकि वे अच्छी तरह से पढ़ाई कर सकें, जिसके लिए उनका आहार और पोषण अत्यंत महत्वपूर्ण है।
मुख्यमंत्री ने अक्षय पात्र फाउंडेशन को दिल्ली में 6 वर्षों की निरंतर सेवा और ‘सुबह के पोषण कार्यक्रम’ के शुभारंभ के लिए साधुवाद दिया। उन्होंने कहा कि सरकार इस पुनीत प्रयास में पूर्ण सहयोग के साथ आपके साथ दृढ़ता से खड़ी है। सेवा का यह संकल्प निरंतर आगे बढ़ता रहे, यही कामना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पीएम पोषण, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून और पोषण अभियान ने देश में पोषण को जनआंदोलन का स्वरूप दिया है। आज हर बच्चे के स्वस्थ भविष्य को राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। यह संकल्प केवल योजनाओं तक सीमित नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सशक्त निर्माण की मजबूत आधारशिला है।
इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता श्याम जाजू तथा अक्षय पात्र फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष भरतर्षभ दास, उपाध्यक्ष चंचलपति दास, दिल्ली नगर निगम शिक्षा समिति के अध्यक्ष योगेश वर्मा उपस्थित रहे।
अक्षय पात्र फाउंडेशन के ‘सुबह के पोषण कार्यक्रम’ की दिल्ली में शुरुआत के साथ एक महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ाया गया है। यह एक पूरक पोषण पहल है जिसे स्कूली शिक्षा के शुरुआती घंटों में पोषण की गंभीर कमी को पूरा करने के लिए डिजाइन किया गया है। जहां एक पौष्टिक दोपहर का भोजन दिनभर के लिए ऊर्जा प्रदान करता है, वहीं एक पौष्टिक शुरुआत बच्चे के मन और शरीर के लिए उतनी ही महत्वपूर्ण है।
हर सुबह, कई बच्चे ठीक से नाश्ता किए बिना स्कूल आते हैं। नतीजतन, सुबह के शुरुआती घंटों में उनमें ऊर्जा की कमी होती है, जिससे उनकी संज्ञानात्मक क्षमता प्रभावित होती है और कक्षा में उनका ध्यान कम हो जाता है। लंबे समय में, इससे सीखने में कमी आ सकती है और उनके शैक्षणिक प्रदर्शन पर बुरा असर पड़ सकता है।
भारत सरकार की प्रमुख पीएम पोषण पहल (मध्य-दिन भोजन योजना) कक्षा में लंबे समय से चली आ रही भूख और कुपोषण की समस्या का समाधान करती है, लेकिन बच्चों के स्कूल आने और दोपहर के भोजन के बीच का समय उनकी पढ़ाई और एकाग्रता के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। मॉर्निंग न्यूट्रिशन प्रोग्राम प्रोटीन से भरपूर तैयार नाश्ते उपलब्ध कराकर इस कमी को सीधे तौर पर दूर करता है। दोपहर का भोजन बच्चे की दैनिक पोषण संबंधी जरूरतों का लगभग 35-40 प्रतिशत पूरा करता है। इसमें सुबह के पोषण को भी शामिल कर लें, तो यह बढ़कर 60-65 प्रतिशत हो जाता है। इस कार्यक्रम के दोहरे लाभ हैं: पहला, बच्चों के समय पर स्कूल पहुंचने की संभावना बढ़ जाती है। दूसरा, कक्षाओं के दौरान उनका ध्यान भटकने या थकान महसूस होने की संभावना कम हो जाती है। संक्षेप में कहें तो, सुबह का पोषण कार्यक्रम बच्चों के स्वास्थ्य और सीखने की क्षमता को बेहतर बनाने के हमारे सामूहिक प्रयासों को बढ़ावा दे सकता है।
दरअसल, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में कहा गया है, 'पौष्टिक नाश्ते के बाद सुबह के घंटे संज्ञानात्मक रूप से अधिक चुनौतीपूर्ण विषयों के अध्ययन के लिए विशेष रूप से उत्पादक हो सकते हैं।
महज छह महीनों में अक्षय पात्र ने पूरे देश में स्कूली बच्चों को 4 करोड़ से अधिक सुबह के ऊर्जावर्धक नाश्ते परोसे हैं। उनका लक्ष्य प्रति वर्ष 2 करोड़ नाश्ते परोसना है। मध्याह्न भोजन के लिए हमारे मौजूदा बुनियादी ढांचे, यानी 16 राज्यों और 3 केंद्रशासित प्रदेशों के 78 स्थानों पर फैले 23,000 से अधिक स्कूलों में रसोई के नेटवर्क का लाभ उठाकर, हम मध्याह्न भोजन लाभार्थियों को बिना किसी अतिरिक्त प्रशासनिक लागत के ये नाश्ते उपलब्ध करा सकते हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव

