अभाविप ने सीबीएसई की त्रि-भाषा नीति लागू करने के निर्णय का किया स्वागत

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अभाविप ने सीबीएसई की त्रि-भाषा नीति लागू करने के निर्णय का किया स्वागत


अभाविप ने सीबीएसई की त्रि-भाषा नीति लागू करने के निर्णय का किया स्वागत


नई दिल्ली, 19 मई (हि.स.)। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा शैक्षणिक सत्र 2026–27 से कक्षा 9 के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा 2023 के अनुरूप त्रि-भाषा नीति को अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्णय का स्वागत किया है। अभाविप ने इसे भारतीय भाषाओं के सुदृढ़ीकरण और भाषाई विविधता के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।

अभाविप ने कहा कि बोर्ड का यह निर्णय स्कूली शिक्षा को अधिक लचीला, समावेशी और भविष्योन्मुखी बनाने में सहायक होगा तथा ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। संगठन ने यह भी मांग की है कि तीनों भाषाओं में बोर्ड परीक्षा आयोजित कराई जाए, ताकि भाषाओं का अध्ययन केवल सीखने तक सीमित न रहकर मूल्यांकन आधारित भी हो और इसके दीर्घकालिक सकारात्मक परिणाम सामने आ सकें।

अभाविप के अनुसार, त्रि-भाषा नीति में तीन में से कम से कम दो भाषाओं के भारतीय मूल की अनिवार्यता देश की भाषाई समृद्धि और सांस्कृतिक जड़ों को और मजबूत करेगी। परिषद का मानना है कि भारत स्वाभाविक रूप से बहुभाषी समाज है, जहां छात्र घर, विद्यालय और कार्यस्थल पर विभिन्न भाषाओं का प्रयोग करते हैं। ऐसे में छात्रों को कई भारतीय भाषाओं में संवाद करने के लिए सक्षम बनाना आवश्यक है।

संगठन ने कहा कि भारतीय भाषाओं के बीच व्याकरण, वाक्य संरचना, शब्दावली और सांस्कृतिक संदर्भों में समानता होने के कारण छात्र बिना अतिरिक्त मानसिक दबाव के एक साथ कई भाषाएं सीख सकते हैं। परिषद ने बोर्ड द्वारा संथाली, मैथिली, डोगरी और कोंकणी सहित कुल 44 भाषाओं का विकल्प उपलब्ध कराने को भी सराहनीय बताया।

अभाविप के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि सीबीएसई द्वारा त्रि-भाषा नीति को पूर्ण रूप से लागू करने का निर्णय भारतीय शिक्षा के स्वदेशीकरण और राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने की दिशा में सकारात्मक कदम है। उन्होंने कहा कि देश में रोजगार और उच्च शिक्षा के लिए बढ़ते अंतर-राज्यीय प्रवास को देखते हुए भारतीय भाषाओं का ज्ञान छात्रों के भविष्य के लिए उपयोगी सिद्ध होगा।

उन्होंने कहा कि संक्रमण काल में पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता और शिक्षकों की कमी जैसी व्यावहारिक चुनौतियों से निपटने के लिए बोर्ड द्वारा दिए गए लचीले समाधान सराहनीय हैं। साथ ही, तीसरी भाषा का मूल्यांकन विद्यालय स्तर पर आंतरिक रखने से छात्रों पर मुख्य बोर्ड परीक्षा का दबाव कम होगा और वे बिना तनाव के भाषा सीख सकेंगे।

अभाविप ने सुझाव दिया कि भाषाओं के अध्ययन के साथ-साथ बोर्ड परीक्षाएं भी तीनों भाषाओं में आयोजित की जानी चाहिए, जिससे यह नीति और अधिक प्रभावी बन सके। संगठन ने इस संबंध में सीबीएसई से आवश्यक कदम उठाने की मांग की है।

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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी

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