कैग स्वास्थ्य ऑडिट पर सभी विभागों को 31 जुलाई तक कार्रवाई करने का निर्देश

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कैग स्वास्थ्य ऑडिट पर सभी विभागों को 31 जुलाई तक कार्रवाई करने का निर्देश


नई दिल्ली, 09 अप्रैल (हि.स.)। सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रशासनिक कार्रवाई के लिए निर्धारित समय सीमा तय करते हुए दिल्ली विधानसभा सचिवालय ने सभी संबंधित विभागों को लोक लेखा समिति (पैक) की सिफारिशों को लागू करने का निर्देश दिया है। यह निर्देश 31 मार्च 2022 को समाप्त हुए वर्ष के लिए भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) द्वारा 'सार्वजनिक स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे और स्वास्थ्य सेवाओं के प्रबंधन' पर किए गए ऑडिट की पहली रिपोर्ट पर आधारित है।

सभी विभागों को 31 जुलाई तक एक एक्शन टेकन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया है, जिसमें 30 जून तक की स्थिति स्पष्ट रूप से दर्शानी होगी। यह जानकारी एक विज्ञप्ति के जरिए गुरुवार को दी गई है। विज्ञप्ति के मुताबिक, ऑडिट टिप्पणियों को लागू करने योग्य परिणामों में बदलने का संकेत देते हुए यह निर्देश सदन द्वारा रिपोर्ट को औपचारिक रूप से अपनाने के बाद जारी किया गया है।

व्यापक उद्देश्य पर बल देते हुए विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने, सेवाओं की पहुंच बढ़ाने और सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा देखभाल की समान उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयासों का आह्वान किया।

कार्यकारी स्तर पर इन निर्देशों को आगे बढ़ाते हुए दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव को औपचारिक पत्र जारी किया गया है। इसमें समिति के निष्कर्षों और सिफारिशों पर व्यापक और समयबद्ध प्रतिक्रिया मांगी गई है।

यह रिपोर्ट सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे, सर्विस डिलीवरी सिस्टम और स्वास्थ्य सेवाओं के प्रबंधन की विस्तृत समीक्षा करती है। ‘कार्रवाई रिपोर्ट’ में विभागों द्वारा दिए गए आश्वासनों की स्थिति, प्रत्येक सिफारिश पर हुई प्रगति और उसे पूरा करने की स्पष्ट समय-सीमा का उल्लेख आवश्यक है, ताकि इसे विधानसभा के समक्ष प्रस्तुत किया जा सके।

रिपोर्ट के महत्व पर जोर देते हुए विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि बेहतर और कुशल स्वास्थ्य सेवाएं सुशासन का आधार हैं और यह दिल्लीवासियों के प्रति एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मजबूत बुनियादी ढांचा, प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों की उपलब्धता, सभी के लिए समान पहुंच और जवाबदेही तय करना स्वास्थ्य प्रणाली को सशक्त बनाने के लिए जरूरी है, ताकि बढ़ती जरूरतों को पूरा किया जा सके। समिति ने यह भी कहा कि स्वास्थ्य सेवा केवल ढांचे और नीतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि हर नागरिक की गरिमा और कल्याण से जुड़ी है। इसके लिए समय पर कदम उठाना और संसाधनों का निष्पक्ष वितरण अत्यंत आवश्यक है, ताकि एक प्रभावी, समावेशी और संवेदनशील स्वास्थ्य व्यवस्था बनाई जा सके।

इस दृष्टिकोण को नीति निर्माण तक विस्तार देते हुए विजेंद्र गुप्ता ने आगे कहा कि समिति ने दिल्ली सरकार की इस जिम्मेदारी पर भी प्रकाश डाला है कि उसकी नीतियां समावेशी हों। ये नीतियां न केवल दिल्ली के निवासियों के लिए, बल्कि उन लोगों के लिए भी उत्तरदायी होनी चाहिए जो आजीविका, शिक्षा या चिकित्सा देखभाल की तलाश में अन्य राज्यों से दिल्ली आते हैं।

समान पहुंच के सिद्धांत को दोहराते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने जोर दिया कि सस्ती और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं व्यक्ति के मूल राज्य की परवाह किए बिना उपलब्ध होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक अस्पतालों को मजबूत करना, बीमा कवरेज का विस्तार करना और रोकथाम स्वास्थ्य देखभाल में निवेश करना आवश्यक उपाय हैं।

विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि इससे सभी के कल्याण और सामाजिक न्याय को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, बजट, स्टाफ और स्वास्थ्य ढांचा इस तरह तैयार होगा कि दिल्ली में रहने वाले और इलाज के लिए आने वाले हर व्यक्ति को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव

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