दिल्ली के सरकारी स्कूलों को एक शिफ्ट में बदलने की घोषणा गुमराह करने वाली : देवेंद्र यादव

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दिल्ली के सरकारी स्कूलों को एक शिफ्ट में बदलने की घोषणा गुमराह करने वाली : देवेंद्र यादव


नई दिल्ली, 02 जनवरी (हि.स.)। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने दिल्ली सरकार के जरिए दो शिफ्टों में चल रहे दिल्ली के सरकारी स्कूलों को एक शिफ्ट में बदलने की घोषणा को गुमराह करने वाला बताया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा निदेशालय के अनुसार कुल 799 स्कूल है और 284 स्कूल दो शिफ्टों में चल रहे और सरकार की नीति के अनुसार सभी स्कूलों को एक शिफ्ट में करने में 25 वर्ष से भी अधिक का समय लगेगा।

देवेंद्र यादव ने शुक्रवार को एक विज्ञप्ति जारी कर कहा कि दिल्ली के सरकारी स्कूलों में लगातार गिरते शिक्षा के स्तर के कारण दिल्ली सरकार के स्कूलों में छात्रों की संख्या लगातार कम हो रही है। शिक्षा निदेशालय का हर वर्ष 10 स्कूल बनाने के लक्ष्य पर 284 स्कूलों को एक शिफ्ट का करने के लिए अभी सिर्फ 70 खाली प्लाट ही चिन्हित किए हैं, जबकि वर्ष 2013 में कांग्रेस की शीला दीक्षित सरकार 1000 जगह नए सरकारी स्कूल बनाने के लिए चिन्हित किए थे और हर वर्ष 200 स्कूल बनाने का लक्ष्य रखा था। उन्होंने कहा कि पांच वर्ष में 50 स्कूल बनाने की भाजपा सरकार की निर्माण गति इनकी मंशा को दर्शाती है कि ये दिल्ली और दिल्ली का भविष्य छात्रों के प्रति कितने संवेदनशील है।

देवेंद्र यादव ने कहा कि आम आदमी पार्टी (आआपा) की सरकार पूरे कार्यकाल में शिक्षा मॉडल को बदलने का बखान करती रही लेकिन नए स्कूल बनाने में पूरी तरह विफल साबित रही, सिर्फ 10 वर्ष में 8-10 स्कूल बनाए और स्कूलों में क्लास रुम बढ़ाने में भी भ्रष्टाचार किया। कांग्रेस सरकार द्वारा स्कूलों के लिए चिन्हित जगहों पर न तो आआपा की सरकार ने गौर की और नहीं भाजपा सरकार इस ओर ध्यान दे रही है।

देवेंद्र यादव ने कहा कि भाजपा ने विधानसभा चुनाव में सरकारी स्कूलों में कक्षाओं में अधिक तादात में बच्चों होने की बात कही थी। अगर दो शिफ्टों में बच्चे पढ़ने से एक कक्षा में क्षमता से अधिक बच्चे है, अगर सरकार सभी छात्रों को एक शिफ्ट में ले आएगी तो स्कूलों का क्या हाल होगा। उन्होंने कहा कि अनुपात से अधिक कक्षा में छात्रों के कारण परीक्षा परिणाम तक प्रभावित हो रहे है जिसके छात्र हर वर्ष सरकारी स्कूल छोड़ कर निजी स्कूलों की तरफ रुख कर रहे हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव

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