आआपा ने स्थायी समिति को पूरा होने से पहले भंग करने पर जताई आपत्ति, 12 जून तक कार्यकाल बढ़ाने की मांग
नई दिल्ली, 08 अप्रैल (हि.स.)। आम आदमी पार्टी (आआपा) ने दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की स्थायी समिति को कार्यकाल पूरा होने से पहले ही भंग करने पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने स्थायी समिति का कार्यकाल 12 जून तक बढ़ाने की मांग की।
एमसीडी में सह प्रभारी प्रवीण कुमार ने अपनी समकक्ष प्रीति डोगरा के साथ बुधवार को पार्टी मुख्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि 12 जून को समिति का कार्यकाल समाप्त हो रहा था, लेकिन स्थायी समिति ने एक प्रस्ताव लाकर इसके कार्यकाल को 31 मार्च तक सीमित कर दिया।
प्रवीण कुमार ने कहा कि पिछली सरकार ने एक प्रस्ताव पारित किया था। इसमें कहा गया था कि जब तक नई स्थायी समिति नहीं बन जाती या समिति का एक साल पूरा नहीं हो जाता, तब तक उसका कार्यकाल चलता रहेगा। उन्होंने कहा कि उस प्रस्ताव में ये था कि सदस्यों का एक साल पूरा होने से पहले या समिति का एक साल पूरा होने से पहले उसे भंग नहीं किया जा सकता।
प्रवीण कुमार ने कहा कि प्रस्ताव पारित कर 31 मार्च तक कार्यकाल खत्म कर दिया गया। इसका मतलब है कि 31 मार्च को स्थायी समिति का कार्यकाल खत्म हो गया और जब तक नए पदाधिकारी चुनकर नहीं आते, तब तक कोई भी बैठक नहीं हो सकेगी।
प्रवीण कुमार ने कहा कि दिल्ली नगर निगम अधिनियम की धारा 68 स्पष्ट रूप से बताती है कि स्थायी समिति या वार्ड समिति तब तक कार्य करती रहेगी, जब तक कि अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार नई समिति का गठन नहीं हो जाता। कानून में यह साफ लिखा है कि जब तक नई समिति नहीं बन जाती, तब तक पुरानी स्थायी समिति चलती रहेगी। लेकिन समिति साफ तौर पर मुकर रही है और कह रही है कि वह किसी भी तरह की बैठक नहीं करेगी।
प्रवीण कुमार ने कहा कि इसका मतलब यह है कि स्थायी समिति के सारे काम रुक जाएंगे। कमिश्नर और अधिकारियों की शक्तियां बढ़ाने का मतलब था कि स्थायी समिति को लाचार और कमजोर किया जा सके।
उन्होंने कहा कि जब तक नई समिति का गठन नहीं हो जाता, स्थायी समिति की बैठक जल्द से जल्द बुलाई जाए। पिछली स्थायी समिति 12 जून 2025 को बनी थी। इसका मतलब है कि कानून के अनुसार वह अपना कार्यकाल पूरा होने तक कार्य कर सकती है, बैठकें कर सकती है और फैसले ले सकती है। वह कानून के अनुसार अपने प्रावधान पास कर सकती है।
प्रीति डोगरा ने कहा कि आआपा निगम से मांग करती है कि इस स्थायी समिति को 12 जून तक निरंतर चलने दिया जाए और सभी सदस्यों की सदस्यता बरकरार रखी जाए, उन्हें बाहर न किया जाए। इसका सीधा असर दिल्ली की जनता पर पड़ता है, इसलिए विकास कार्य पूरी तरह से होते रहने चाहिए, उन्हें रोका न जाए।
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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी

