(अपडेट) शालीमार बाग में सड़क चौड़ीकरण के लिए अवैध निर्माण पूरी तरह हटाने तक जारी रहेगा अभियान

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(अपडेट) शालीमार बाग में सड़क चौड़ीकरण के लिए अवैध निर्माण पूरी तरह हटाने तक जारी रहेगा अभियान


नई दिल्ली, 31 मई (हि.स.)। उच्चतम न्यायालय द्वारा दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश को बरकरार रखने के बाद रविवार सुबह से शालीमार बाग स्थित गांव हैदरपुर क्षेत्र में रोड नंबर-320 के निर्धारित राइट ऑफ वे के भीतर बने अवैध निर्माणों को हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई तब तक जारी रहेगी, जब तक निर्धारित क्षेत्र में स्थित सभी अवैध संरचनाओं (स्ट्रक्चर्स) को हटाकर सड़क चौड़ीकरण परियोजना के लिए भूमि उपलब्ध नहीं करा दी जाती।

मध्य-उत्तर जिला के जिलाधिकारी (डीएम) एसएस परिहार ने आज बयान जारी कर बताया कि यह कार्रवाई न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में की जा रही है। संबंधित भूमि अधिग्रहित सरकारी भूमि है, जो दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के मास्टर प्लान में सार्वजनिक सड़क के रूप में चिन्हित है तथा रोड नंबर-320 के निर्धारित राइट ऑफ वे का हिस्सा है।

उन्होंने बताया कि यह सड़क शालीमार बाग रेलवे अंडर ब्रिज (आरयूबी) को आउटर रिंग रोड से जोड़ने वाले महत्वपूर्ण यातायात गलियारे का हिस्सा है। यह मार्ग रिंग रोड, आजादपुर, शालीमार बाग तथा आसपास के बड़े आवासीय, व्यावसायिक एवं संस्थागत क्षेत्रों को जोड़ता है। इसके माध्यम से अस्पतालों, सरकारी कार्यालयों और विकसित हो रहे प्रशासनिक परिसरों तक पहुंच सुनिश्चित होती है।

उन्होंने कहा कि सड़क की वर्तमान चौड़ाई अतिक्रमणों के कारण गंभीर रूप से प्रभावित हुई है, जिससे नियमित यातायात जाम की स्थिति उत्पन्न होती है और एम्बुलेंस, अग्निशमन वाहनों तथा अन्य आपातकालीन सेवाओं को आवागमन में कठिनाई का सामना करना पड़ता है।

परिहार ने बताया कि 6 अप्रैल को दिल्ली हाईकोर्ट ने इससे संबंधित याचिका खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ताओं के पास पूर्व-अधिग्रहण स्वामित्व के वैध दस्तावेज नहीं हैं, भूमि का अधिग्रहण वैध है तथा सार्वजनिक महत्व की सड़क परियोजना को रोका नहीं जा सकता। इसके बाद 18 मई को पुनर्विचार याचिका भी खारिज कर दी गई। उन्होंने बताया कि इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने सर्वोच्च न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका दायर की। 29 मई को सर्वोच्च न्यायालय में मामले की सुनवाई हुई और न्यायालय ने विशेष अनुमति याचिका खारिज करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा। इसके साथ ही प्रशासन के पक्ष को अंतिम न्यायिक स्वीकृति प्राप्त हो गई।

परिहार ने कहा कि दिल्ली सरकार ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए प्रभावित पात्र परिवारों के लिए विशेष सहायता पैकेज भी घोषित किया है। इसके अंतर्गत प्रत्येक पात्र परिवार अथवा इकाई को 3 लाख रुपये की एकमुश्त एक्स-ग्रेशिया सहायता प्रदान की जाएगी। इसके अतिरिक्त जिन परिवारों के पास दिल्ली में कोई वैकल्पिक आवास उपलब्ध नहीं है, उन्हें सावदा घेवरा स्थित आवासीय इकाइयों में 11 माह तक लाइसेंस आधारित अस्थायी आवास सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव

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