हिंदी चेतना शिखर सम्मेलन में हिंदी और देवनागरी के संवर्धन पर जोर, 51 विभूतियां सम्मानित

WhatsApp Channel Join Now


हिंदी चेतना शिखर सम्मेलन में हिंदी और देवनागरी के संवर्धन पर जोर, 51 विभूतियां सम्मानित


नई दिल्ली, 15 जनवरी (हि.स.)। हिंदी भाषा, देवनागरी लिपि और भारतीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श के लिए आयोजित ‘हिंदी चेतना शिखर’ सम्मेलन का आयोजन किया किया गया। कार्यक्रम के दौरान देश और विदेश से चयनित 51 विभूतियों को हिंदी, शिक्षा, साहित्य, संस्कृति और समाजसेवा के क्षेत्र में योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम का आयोजन देवनागरी उत्थान फाउंडेशन, धरा धाम इंटरनेशनल, पं. तिलक राज शर्मा स्मृति ट्रस्ट (अमेरिका) और एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स (श्रीलंका) ने किया। समारोह में भारत, अमेरिका, माल्टा और अन्य देशों से आए शिक्षाविदों, साहित्यकारों, शोधकर्ताओं और सामाजिक चिंतकों ने हिस्सा लिया।

कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक दूत रसायाचार्य डॉ. आई. मेड धर्मायसा, संयुक्त राष्ट्र से संबद्ध आधिकारिक प्रतिनिधि जनरल प्रो. जसवीर सिंह, मदरहुड यूनिवर्सिटी, रुड़की के कुलपति तथा अंतरराष्ट्रीय शिक्षाविद और हिंदी-देवनागरी प्रवर्तक डॉ. इंदरजीत शर्मा प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

सम्मेलन इन लोगों ने कहा कि तकनीकी युग में हिंदी और देवनागरी को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए शिक्षा, शोध और डिजिटल माध्यमों का प्रभावी उपयोग आवश्यक है। साथ ही नई पीढ़ी को भाषा और संस्कृति से जोड़ने के लिए संस्थागत प्रयासों पर बल दिया गया।

समारोह में हिंदी भाषा, देवनागरी लिपि, शिक्षा, साहित्य, संस्कृति और समाजसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली 51 विभूतियों को भारतेन्दु हरिश्चंद अंतरराष्ट्रीय गौरव सम्मान प्रदान किया गया। इसके अलावा 21 विभूतियों को धरा धाम गौरव सम्मान, तीन को लोक गौरव सम्मान, 15 को लोक मंगल विभूषण (लाइफ टाइम अचीवमेंट सम्मान) और सात विभूतियों को विद्या वाचस्पति मानद उपाधि दी गई।

इसके साथ ही डॉ. निशा अग्रवाल और डॉ. राकेश वशिष्ठ को एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की ओर से वर्ल्ड रिकॉर्ड सर्टिफिकेट दिया गया। समारोह के दौरान प्रो. डॉ. मूल चन्द को देवनागरी उत्थान फाउंडेशन का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किए जाने की भी घोषणा की गई।

कार्यक्रम में देवनागरी उत्थान फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. सुनील दुबे, धरा धाम इंटरनेशनल के राष्ट्रीय संयोजक डॉ. प्रेम प्रकाश पाण्डेय, एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के प्रतिनिधि डॉ. नारायण यादव, डॉ. बी. एम. उवैस, डॉ. सचिदानंद झा ‘शांडिल्य’ और डॉ. शंभू पंवार सहित कई पदाधिकारियों ने हिंदी भाषा से एनी भाषाओं के जुड़ाव के बारे में बताया।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी

Share this story