बलरामपुर राज्योत्सव में दिखी विकास और लोकसंस्कृति की झलक, योजनाओं के लाभ के साथ मंच पर बिखरे सांस्कृतिक रंग

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बलरामपुर राज्योत्सव में दिखी विकास और लोकसंस्कृति की झलक, योजनाओं के लाभ के साथ मंच पर बिखरे सांस्कृतिक रंग


बलरामपुर राज्योत्सव में दिखी विकास और लोकसंस्कृति की झलक, योजनाओं के लाभ के साथ मंच पर बिखरे सांस्कृतिक रंग


बलरामपुर, 02 नवंबर (हि.स.)। छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना की 26वीं वर्षगांठ पर सोमवार को हाई स्कूल मैदान में जिला स्तरीय राज्योत्सव का आयोजन किया गया। ‘सशक्त नारी, युवा उड़ान’ थीम पर आयोजित इस कार्यक्रम में शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं, जिले की उपलब्धियों और विकास कार्यों को विभागीय स्टॉलों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया। वहीं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने आयोजन में लोककला और परंपराओं के रंग बिखेरे।

कार्यक्रम में सरगुजा सांसद चिंतामणि महाराज मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उनके साथ सामरी विधायक उद्धेश्वरी पैकरा, जिला पंचायत अध्यक्ष हीरामुनी निकुंज, जनपद पंचायत बलरामपुर अध्यक्ष सुमित्रा चेरवा, नगर पालिका अध्यक्ष लोधीराम एक्का सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे। अतिथियों ने विभागीय प्रदर्शनी का अवलोकन करने के बाद दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

मुख्य अतिथि सांसद चिंतामणि महाराज ने छत्तीसगढ़ी में जय जोहार के साथ लोगों का अभिवादन किया। उन्होंने कहा कि राज्य अपनी स्थापना के 26 वर्ष पूरे कर चुका है और इस वर्ष का आयोजन ‘सशक्त नारी, युवा उड़ान’ की थीम पर आधारित है। उन्होंने कहा कि बेटियों के विद्यालय का मैदान इस थीम का प्रतीक है, जहां से शिक्षा प्राप्त कर निकलने वाली बेटियां भविष्य में प्रदेश की दिशा तय करेंगी। उन्होंने छत्तीसगढ़ के खनिज आधारित प्रदेश से औद्योगिक राज्य के रूप में आगे बढ़ने और अंबिकापुर के मां महामाया हवाई अड्डे से हवाई सेवाओं का उल्लेख किया।

सांसद ने प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना और महतारी वंदन योजना का जिक्र करते हुए कहा कि इन योजनाओं से महिलाओं के जीवन में बदलाव आया है। धरती आबा अभियान और पीएम-जनमन के माध्यम से आदिवासी क्षेत्रों में सड़क, आवास, पानी और बिजली जैसी सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। उन्होंने बेटियों से बड़े सपने देखने और युवाओं से रोजगार मांगने के बजाय रोजगार देने वाला बनने का आह्वान किया। साथ ही कहा कि पात्र लोगों तक शासकीय योजनाओं का लाभ पहुंचाना सभी की साझा जिम्मेदारी है। सामरी विधायक उद्धेश्वरी पैकरा ने भी जिलेवासियों को राज्योत्सव की शुभकामनाएं दीं।

कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी ने स्वागत उद्बोधन में जिले के विकास में महिलाओं और युवाओं की भागीदारी पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि जिले में 10 हजार से अधिक स्व-सहायता समूहों से करीब 1 लाख 15 हजार परिवार जुड़े हैं। समूहों की महिलाएं छोटी बचत से आगे बढ़कर लखपति दीदी बनने की दिशा में काम कर रही हैं। उन्होंने बताया कि प्रिज्मा एआई के साथ हुए समझौते के बाद बलरामपुर प्रदेश का पहला जिला बना है, जहां एआई डेटा एनोटेशन सेंटर स्थापित किया गया है। इसके माध्यम से जिले की महिलाएं और युवा अपने क्षेत्र में रहकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े काम सीख सकेंगे।

कलेक्टर ने मिशन आचार्य के जरिए शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के प्रयासों और ‘बालभोग’ योजना की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि आकांक्षी विकासखंड शंकरगढ़ के 967 बच्चों को प्रतिदिन रागी और मिलेट्स से बना पौष्टिक लड्डू दिया जा रहा है। इसके अलावा चांगरो के जैविक जीराफूल चावल की ब्रांडिंग और जल संरक्षण के लिए किसानों द्वारा स्वेच्छा से अपनी भूमि का 5 प्रतिशत हिस्सा देने वाले मॉडल का उल्लेख किया। उन्होंने इसे विनोबा भावे के भूदान आंदोलन की परंपरा से जोड़ते हुए जल संरक्षण की दिशा में सामूहिक पहल बताया। इस अवसर पर कलेक्टर ने मुख्य अतिथि को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।

कार्यक्रम में विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को सामग्री और सहायता राशि प्रदान की गई। समाज कल्याण विभाग की ओर से पूजा मंडल, आर्यन रवि और अनिकेत तिर्की को व्हीलचेयर दी गई। प्रमोद कोड़ाकू को दिव्यांगजन विवाह प्रोत्साहन योजना के तहत 50 हजार रुपये और महेंद्र कांसी को दिव्यांगजन उच्च शिक्षा प्रोत्साहन योजना के तहत 6 हजार रुपये का चेक प्रदान किया गया। वन विभाग की ओर से हाथी के हमले में जनहानि के प्रकरण में 6 लाख रुपये और मकान क्षति के मामले में 25 हजार रुपये की क्षतिपूर्ति राशि दी गई। वहीं स्वामित्व योजना के तहत ग्राम भनौरा के हितग्राहियों को अधिकार अभिलेख वितरित किए गए।

राज्योत्सव की सांस्कृतिक संध्या में जिले के विद्यालयों और छात्रावासों के विद्यार्थियों ने छत्तीसगढ़ी स्वागत नृत्य, सुवा नृत्य, छत्तीसगढ़ी रिमिक्स, शिव तांडव, कान्हा और सूफी नृत्य सहित विभिन्न प्रस्तुतियां दीं। इसके साथ ही घूमर, हरियाणवी, अरुणाचली और नेपाली लोकनृत्यों ने भी दर्शकों का ध्यान खींचा। भेलवाडीह के पहाड़ी कोरवा कलाकारों ने उड़िया लोकनृत्य और नारी सशक्तिकरण पर आधारित प्रस्तुति दी, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। कसडोल के लोक मंथन दल ने जनजातीय नृत्य के माध्यम से वनांचल की संस्कृति को मंच पर उतारा। बिलासपुर की वाइब्रेशन डांस एकेडमी ने पारंपरिक वेशभूषा में लोकनृत्य प्रस्तुत किए, जबकि बनारस के अक्षत कलेक्टिव ने उप-शास्त्रीय और सुगम गायन से सांस्कृतिक संध्या को सुरमय बनाया।

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हिन्दुस्थान समाचार / विष्णु पांडेय

Livevns.news Desk
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