जांजगीर-चांपा में महिला आयोग की जनसुनवाई: 28 प्रकरणों की हुई सुनवाई

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जांजगीर-चांपा में महिला आयोग की जनसुनवाई: 28 प्रकरणों की हुई सुनवाई


जांजगीर-चांपा, 7 जुलाई (हि. स.)। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक ने मंगलवार को जिला पंचायत जांजगीर के सभाकक्ष में महिला उत्पीड़न से जुड़े मामलों की जनसुनवाई की। इस दौरान आयोग की सदस्य श्रीमती सरला कोसरिया भी उपस्थित रहीं। अध्यक्ष डॉ. नायक की अध्यक्षता में प्रदेश स्तर पर यह 410वीं तथा जांजगीर-चांपा जिले में 12वीं जनसुनवाई आयोजित की गई, जिसमें कुल 28 प्रकरणों पर सुनवाई की गई।

सुनवाई के दौरान कई मामलों में आपसी समझौते, पारिवारिक विवाद, भरण-पोषण, डीएनए परीक्षण, लंबित न्यायालयीन प्रकरण तथा कार्यस्थल पर महिलाओं के उत्पीड़न से संबंधित शिकायतों पर विस्तृत चर्चा हुई। आयोग ने सभी पक्षों को सुनने के बाद आवश्यक निर्देश जारी किए।

एक मामले में आवेदिका ने आयोग को बताया कि मार्च 2026 में परिवार परामर्श केंद्र में दोनों पक्षों के बीच समझौता हो चुका है। दंपति का साढ़े तीन वर्षीय पुत्र है तथा पति वन रक्षक के पद पर कार्यरत है। दोनों वर्तमान में अलग मकान लेकर आपसी सामंजस्य के साथ रह रहे हैं। आयोग ने दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद भविष्य में विवाद से बचने की समझाइश दी और सखी प्रशासिका को निर्देशित किया कि दोनों की प्रत्येक माह काउंसलिंग कराई जाए।

एक अन्य मामले में दोनों पक्ष आयोग के समक्ष उपस्थित हुए। सुनवाई के दौरान अनावेदकों ने आवेदिका से सार्वजनिक रूप से माफी मांगी। यह मामला वर्ष 2024 में महिला आयोग कार्यालय में आयोग के कर्मचारियों के साथ अभद्र व्यवहार और कार्यालय समय के बाद हुए दुर्व्यवहार से जुड़ा था, जिसकी शिकायत गोल बाजार थाने में दर्ज कराई गई थी। आयोग ने सभी पक्षों को समझाइश देते हुए प्रकरण का निराकरण कर दिया।

भरण-पोषण और डीएनए परीक्षण से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में आयोग ने सख्त रुख अपनाया। सुनवाई में आवेदिका उपस्थित रही, जबकि अनावेदक अनुपस्थित था। आयोग ने बताया कि पिछली सुनवाई में अनावेदक, जो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में लैब टेक्नीशियन के पद पर कार्यरत है और लगभग 70 हजार रुपये मासिक वेतन प्राप्त करता है, को बच्चे का डीएनए परीक्षण कराने, पूरा खर्च उठाने तथा जांच पूरी होने तक प्रतिमाह 5 हजार रुपये भरण-पोषण देने का निर्देश दिया गया था। आदेश का पालन नहीं करने पर आयोग ने सखी प्रशासिका को निर्देश दिए कि आवेदिका, अनावेदक और बच्चे का डीएनए परीक्षण कराया जाए, जिसका पूरा खर्च अनावेदक वहन करेगा। साथ ही दो माह के भीतर जांच रिपोर्ट आयोग के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा गया।

एक अन्य मामले में आयोग ने पाया कि आवेदिका ने यह तथ्य छिपाया था कि दोनों पक्षों के बीच तलाक का मामला न्यायालय में विचाराधीन है। चूंकि मामला पहले से न्यायालय में लंबित है, इसलिए आयोग ने इसे सुनवाई योग्य नहीं मानते हुए प्रकरण को नस्तीबद्ध कर दिया।

कार्यस्थल पर महिला उत्पीड़न से जुड़े एक मामले में महिला चिकित्सकों ने अपने प्रोजेक्ट मैनेजर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। आयोग ने निर्देश दिया कि सभी महिला कर्मचारी विस्तृत संशोधित शिकायत आयोग को प्रस्तुत करें तथा उसकी प्रति सखी प्रशासिका को उपलब्ध कराई जाए। साथ ही सखी प्रशासिका को निर्देशित किया गया कि मामले की जांच के लिए आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) के माध्यम से कार्रवाई सुनिश्चित करने हेतु मुख्य चिकित्सा अधिकारी, शिवरीनारायण को पत्र भेजा जाए।

जनसुनवाई के दौरान आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक ने कहा कि महिलाओं के अधिकारों की रक्षा, त्वरित न्याय और पारिवारिक विवादों का शांतिपूर्ण समाधान आयोग की प्राथमिकता है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि आयोग के आदेशों का समयबद्ध पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि पीड़ित महिलाओं को शीघ्र राहत मिल सके।

हिन्दुस्थान समाचार / LALIMA SHUKLA PUROHIT

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