पोल्ट्री पालन से आत्मनिर्भर बन रहीं महिला किसान

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पोल्ट्री पालन से आत्मनिर्भर बन रहीं महिला किसान


सूरजपुर, 06 सितंबर (हि.स.)। सूरजपुर जिले के ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने के लिए जिले में बिहान के तहत कई गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इसी कड़ी में इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर (आईएफसी) के माध्यम से महिला किसान दीदियों को खेती के साथ पशुधन और पोल्ट्री पालन से जोड़ा जा रहा है। इसका उद्देश्य महिलाओं के लिए गांव में ही रोजगार और अतिरिक्त आय के साधन विकसित करना है।

शिवनंदनपुर स्थित उमंग महिला क्लस्टर संगठन के तहत आईएफसी से जुड़ी 300 महिला किसान दीदियों को पोल्ट्री पालन की गतिविधि से जोड़ा गया है। चयनित उद्यमी दीदी को 25 हजार रुपये की ऋण सहायता दी गई, जिससे उन्होंने ब्रूडिंग सेंटर शुरू किया। इसके माध्यम से महिलाओं को पोल्ट्री पालन से नियमित आय अर्जित करने का अवसर मिल रहा है।

पोल्ट्री पालन की शुरुआत 500 चूजों से की गई। महिलाओं को चूजों के वैज्ञानिक पालन-पोषण, संतुलित आहार, साफ पानी, उचित आवास, टीकाकरण और स्वास्थ्य देखभाल का प्रशिक्षण दिया गया।

शुरुआती चरण में 400 चूजों की बिक्री की जा चुकी है। इससे उद्यमी दीदी को करीब 6 हजार रुपये का शुद्ध लाभ हुआ। कम लागत से शुरू हुई इस गतिविधि से महिलाओं को अपने गांव में ही आय का साधन मिल रहा है।

इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर के जरिए महिला किसानों को केवल खेती तक सीमित नहीं रखा जा रहा है। उन्हें कृषि के साथ पशुपालन और पोल्ट्री जैसी गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। इससे ग्रामीण परिवारों के लिए आय के कई स्रोत तैयार हो रहे हैं।

विकासखंड परियोजना प्रबंधक माधुरी भंडारी ने बताया कि आईएफसी के तहत महिलाओं को कृषि के साथ पशुधन आधारित गतिविधियों से जोड़कर टिकाऊ आजीविका मॉडल तैयार किया जा रहा है। महिलाओं को उत्पादन, प्रबंधन और बिक्री तक जरूरी प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन दिया जा रहा है, ताकि पोल्ट्री पालन को स्थायी व्यवसाय के रूप में विकसित किया जा सके।

हुस्ना ने कहा- बढ़ा आत्मविश्वास

ग्राम दतिमा की हुस्ना परवीन ने बताया कि बिहान के माध्यम से उन्हें गांव में ही रोजगार का अवसर मिला है। पोल्ट्री पालन के लिए चूजे, प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन मिलने से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है।

हुस्ना ने कहा कि विष्णु भैया महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रयास कर रहे हैं, जिसका लाभ ग्रामीण महिलाओं को मिल रहा है। अब वे परिवार की आय बढ़ाने के साथ खुद भी आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनना चाहती हैं।

जिले में बिहान से जुड़ी महिला स्व-सहायता समूहों को अलग-अलग आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने का काम जारी है। पोल्ट्री पालन जैसी गतिविधियों से महिलाओं को गांव में ही रोजगार मिल रहा है और ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने के नए रास्ते तैयार हो रहे हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / विष्णु पांडेय

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