विष्णुदेव सरकार किसानाें काे धान बेचने से वंचित करने का षढ़यंत्र कर रही : उमाशंकर शुक्ला

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विष्णुदेव सरकार किसानाें काे धान बेचने से वंचित करने का षढ़यंत्र कर रही : उमाशंकर शुक्ला


विष्णुदेव सरकार किसानाें काे धान बेचने से वंचित करने का षढ़यंत्र कर रही : उमाशंकर शुक्ला


जगदलपुर, 15 सितंबर (हि.स.)। प्रदेश कांग्रेस के संयुक्त महासचिव उमाशंकर शुक्ला ने मंगलवार काे बयान जारी कर कहा कि किसानाे काे समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए प्रदेश की विष्णुदेव की सरकार लगातार नियम बदल रही है, जिससे छत्तीसगढ के किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

उन्हाेंने कहा कि कुछ दिन पहले एग्री स्टेक पंजीयन को लेकर किसान परेशान थे, इससे ले देकर पंजीयन करवाकर बाहर निकलने का प्रयास करते रहे। अब नए नियम से किसानों की दिक्कत और बढ़ गई है। प्रदेश सरकार किसानों का धान नहीं खरीदने के लिए एक के बाद एक नये-नये पैतरे अजमाने के क्रम में अब किसानाें का डिजिटल रिकॉर्ड बनाने के बहाने किसानाे काे समर्थन मूल्य पर धान बेचने से वंचित करने के लिए षढ़यंत्र कर रही है।

उमाशंकर शुक्ला ने कहा कि परेशान किसानों ने हमें बताया कि राजस्व विभाग, कृषि विभाग से जानकारी मिली है कि सहकारी समितियों के जरिए होने वाली धान खरीदी में नई व्यवस्था लागू की गई है। इस नई व्यवस्था में संयुक्त खाताधारक किसानाें के लिए नियम में बदलाव कर समर्थन मूल्य पर धान बेचने से वंचित करने के लिए मास्टर प्लान जारी कर दिया है। अब किसानें के संयुक्त खाते में सिर्फ परिवार के मुखिया का पंजीयन काफी नहीं होगा। जमीन के खसरे में दर्ज सभी सहखातेदारों का अलग-अलग एग्री स्टेक पंजीयन अनिवार्य होगा। इसमें भाई, बहन, बेटियां भी शामिल हैं। तभी वे अपनी हिस्सेदारी का धान बेच पाएंगे। किसानों से कहा गया है कि अंतिम तिथि का इंतजार न करें, समय पर पंजीयन कराएं। जिससे धान बेचने में समस्या न आए।

उमाशंकर शुक्ला ने बताया कि सहखातेदारों का पंजीयन भी अनिवार्य किया गया है। जिन किसानों की ऋण पुस्तिका या भूमि खाते में दो, तीन, चार लोगों के नाम दर्ज हैं, उन्हें अलग-अलग एग्री स्टेक पंजीयन कराना होगा। एक खाते में एक से अधिक खसरा नंबर दर्ज है तो उस खाते के सभी सहखातेदारों को उन सभी खसरों पर भी पंजीयन कराना होगा। इस नियम से सबसे बड़ी परेशानी प्रवासी किसानों को होगी।

जानकारी के अनुसार बस्तर जिले के कई किसान काम के लिए देश के अलग-अलग राज्यों में जाते हैं। नए नियम के तहत इन प्रवासी लोगों को वापस आना होगा। परिवार को सरकार को धान बेचने में परेशानी न हो, इससे पैसा, समय दोनों बर्बाद होंगे। सहखातेदारों के बीच यदि मनमुटाव या विवद की स्थति में एसे किसान इस वर्ष धान बेचने से वंचित हाे जायेंगे । सहखातेदारों में शामिल बहन, बेटियां अन्य प्रदेशाें में अपने ससुराल में रहती हैं, ताे उन्हे यहां पंहुचकर पंजीयन करवाना हाेगा, अन्यथा किसान इस वर्ष धान बेचने से वंचित हाे जायेंगे।

उन्हाेने कहा कि सबसे बड़ी समस्या किसानाें काे तब हाेगी जब सहखातेदारों की मृत्यू हाे गई हाे, और उसका नाम शामिल खाते में है, ताे उसका जब तक मृत्यू प्रमाण पत्र नही बन जाता और राजस्व न्यायलय के द्वारा फाैती दर्ज कर नाम काटना एवं उसके पत्नि बच्चाें का नाम जाेड़ा नही जाता तब तक किसान धान बेचने से वंचित हाे जायेंगे। कुल मिलाकर प्रदेश की विष्णुदेव की सरकार किसानाें का डिजिटल रिकॉर्ड बनाने के बहाने पंजिकृत किसानाें की संख्या कम करने के लिए एवं किसानाे काे समर्थन मूल्य पर धान बेचने से वंचित करने के लिए बड़ा षढ़यंत्र रचने के काम काे अंजाम दे रही है।

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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे

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