कांकेर में दो परिवार के मूल धर्म में वापसी से इनकार के बाद गांव से बेदखल कर दिया

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कांकेर में दो परिवार के मूल धर्म में वापसी से इनकार के बाद गांव से बेदखल कर दिया


कांकेर, 20 जुलाई (हि.स.)। जिले में ईसाई धर्मांतरण से जुड़े दो नए विवाद सामने आए हैं। एक तरफ ढेकुना गांव में धर्मांतरित व्यक्ति के शव को गांव की सरहद से हटाने की मांग तेज हो गई है, तो दूसरी तरफ ताड़ोकी क्षेत्र के बर्रेबेड़ा गांव में मूल धर्म में वापसी से इनकार पर 2 धर्मांतरित परिवारों को आज साेमवार काे गांव से बेदखल कर दिया गया। इस मामले में विकासखंड के ताड़ोकी थाना क्षेत्र अंतर्गत बर्रेबेड़ा गांव में धर्मांतरण को लेकर तनाव है।

गांव के दो परिवारों ने कई साल पहले धर्मांतरण कर लिया था। पिछले कुछ समय से ग्रामीण उन पर मूल धर्म में वापसी का दबाव बना रहे थे। जब दोनों परिवारों ने इनकार कर दिया तो ग्रामीण एकजुट हुए और सामूहिक निर्णय लेते हुए दोनों घरों का सामान उठाकर गांव की सीमा से बाहर फेंक दिया। इसके बाद घरों में ताला भी लगा दिया गया। घटना के समय तेज बारिश हो रही थी। घरेलू सामान, बर्तन और अनाज भीगते रहे। आरोप है कि घटना के दौरान मौके पर न तो पुलिस थी, और न ही प्रशासन का कोई अधिकारी।

हाटकोंगेरा गांव में शव दफन को लेकर मामला शांत हुआ ही था कि अब पड़ोसी ढेकुना गांव में नया विवाद खड़ा हो गया है। दरअसल हाटकोंगेरा, ढेकुना और नारा तीनों गांव की सरहद आपस में जुड़ी हुई है। हाटकोंगेरा के एक धर्मांतरित परिवार ने अपने मृत सदस्य का शव इसी सरहद पर दफना दिया था। इससे नाराज ढेकुना और नारा गांव के ग्रामीणों ने देर रात ढेकुना में बैठक की।

बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि शव को गांव की सरहद से हटाकर ईसाई समुदाय के कब्रिस्तान में दफनाया जाए। ग्रामीणाें ने चेतावनी दी कि अगर 3 दिन के भीतर शव नहीं हटाया गया तो हम उग्र आंदोलन करेंगे और चक्काजाम भी कर सकते हैं। ढेकुना के सरपंच ने भी प्रशासन से शव हटाने की अपील की है।

इससे पहले हाटकोंगेरा में भी 2 दिन तक शव दफन को लेकर बवाल चला था। सरपंच पर अनुमति देने का आरोप लगाकर उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का आवेदन भी दिया गया था। जिसके बाद मामला शांत हुआ था। कांकेर जिले में पिछले कुछ महीनों से धर्मांतरित व्यक्तियों की मौत के बाद शव दफन और सामाजिक बहिष्कार के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। एक तरफ शव को लेकर गांव-गांव में विरोध है, तो दूसरी तरफ मतांतरण को लेकर सामाजिक तनाव बढ़ रहा है।

हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे

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