कोरबा में चारा-पानी के अभाव में दाे गायों की मौत, 17 दिनों से बाउंड्री में बंद थे मवेशी
कोरबा, 12 अक्टूबर (हि. स.)। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के ग्राम धतूरा में आवारा मवेशियों की देखरेख में कथित लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। यहां शासकीय उचित मूल्य दुकान (सोसायटी) की बाउंड्री के भीतर बंद गायों में से आज दो की मौत हो गई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत द्वारा आवारा मवेशियों को पकड़कर बाउंड्री में बंद कर दिया गया, लेकिन उनके लिए पर्याप्त चारा-पानी की व्यवस्था नहीं की गई। करीब 17 से 18 दिनों से बंद गायों की हालत लगातार बिगड़ती रही। दो गायों की मौत के बाद ग्रामीणों में आक्रोश है। वहीं, पंचायत प्रतिनिधियों पर गायों को गौशाला भेजने के नाम पर प्रत्येक घर से 500-500 रुपये की कथित जबरन वसूली का आरोप भी लगाया गया है।
जानकारी के अनुसार, ग्राम धतूरा में लंबे समय से आवारा मवेशियों की समस्या बनी हुई थी। गांव की सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर घूम रहे मवेशियों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के लिए पंचायतस्तर पर निर्णय लिया गया था। इसके तहत गांव से करीब 52 गायों को अंडी कछार स्थित गौशाला भेजा गया, जबकि लगभग 8 गायों को गांव की शासकीय उचित मूल्य दुकान की बाउंड्री के भीतर ही बंद कर दिया गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि इन गायों को पिछले 17 से 18 दिनों से बाउंड्री के अंदर रखा गया है। इस दौरान उनके लिए पर्याप्त चारा और पीने के पानी की व्यवस्था नहीं की गई। लंबे समय तक भूखे-प्यासे रहने के कारण गायें कमजोर होने लगीं और उनकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई।
ग्रामीणों के अनुसार, बाउंड्री में बंद एक गाय की पहले ही मौत हो चुकी थी। इसके बावजूद पंचायतस्तर पर मवेशियों की देखरेख को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। अब दूसरी गाय की भी मौत हो जाने से गांव में नाराजगी बढ़ गई है। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि यदि समय रहते शेष गायों के लिए चारा-पानी और उपचार की व्यवस्था नहीं की गई, तो उनकी जान भी खतरे में पड़ सकती है।
ग्रामीणों का कहना है कि गायों की खराब स्थिति और चारा-पानी की कमी को लेकर पंचायत प्रतिनिधियों को कई बार अवगत कराया गया था। इसके बावजूद व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया। आरोप है कि बाउंड्री में बंद मवेशियों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण भी नहीं कराया जा रहा है। ऐसे में गायों की मौत ने पंचायत की कार्यप्रणाली और पशुओं के संरक्षण की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस पूरे मामले में ग्रामीणों ने पंचायत प्रतिनिधियों पर आर्थिक वसूली का भी आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि आवारा मवेशियों को पकड़कर गौशाला भेजने के नाम पर गांव के प्रत्येक घर से 500-500 रुपये लिए गए। ग्रामीणों ने इस राशि की कथित जबरन वसूली पर सवाल उठाते हुए इसकी जांच की मांग की है। उनका कहना है कि जब मवेशियों की देखरेख के नाम पर राशि ली गई, तो उनके लिए पर्याप्त चारा-पानी और सुरक्षित आश्रय की व्यवस्था क्यों नहीं की गई।
गांव में लगातार दो गायों की मौत होने से ग्रामीणों में नाराजगी के साथ चिंता भी बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि आवारा मवेशियों की समस्या का समाधान करने के नाम पर उन्हें एक स्थान पर बंद कर देना पर्याप्त नहीं है। उनकी नियमित देखभाल, भोजन, पानी और स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं की व्यवस्था करना भी जरूरी है।
ग्रामीणों ने कोरबा जिला प्रशासन और पशुधन विकास विभाग से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने बाउंड्री में बंद शेष गायों के लिए पर्याप्त चारा-पानी उपलब्ध कराने, पशु चिकित्सकों की टीम भेजकर स्वास्थ्य परीक्षण कराने और सभी मवेशियों को सुरक्षित गौशाला में स्थानांतरित करने की मांग की है।
इसके साथ ही ग्रामीणों ने दो गायों की मौत के वास्तविक कारणों की जांच कराने, कथित वसूली की शिकायत की निष्पक्ष जांच करने और लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
फिलहाल गायों की मौत के वास्तविक कारणों और ग्रामीणों द्वारा लगाए गए वसूली के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। ऐसे में प्रशासनिक जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
हिन्दुस्थान समाचार/हरीश तिवारी
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हिन्दुस्थान समाचार / हरीश तिवारी

