प्राचीन संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण में जनजातीय समाज की अहम भूमिका : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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प्राचीन संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण में जनजातीय समाज की अहम भूमिका : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय


कोरबा, 11 जनवरी (हि. स.)। महर्षि वाल्मीकि आश्रम, आईटीआई रामपुर में आयोजित गौरा पूजा महोत्सव एवं बैगा पुजेरी सम्मेलन में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने गौरा-गौरी पूजन कर जनजातीय समाज को पर्व की शुभकामनाएं दीं और कहा कि आदिवासी समाज का इतिहास गौरवशाली, संस्कृति विशिष्ट और परंपराएं अत्यंत समृद्ध रही हैं। बैगा और पुजेरी समाज आज भी इन परंपराओं को सहेजने का कार्य पूरी निष्ठा से कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने छत्तीसगढ़ राज्य का गठन इसलिए किया था ताकि यहां की बहुसंख्यक आदिवासी आबादी को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनजातीय समाज के सम्मान और उत्थान के लिए 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस घोषित किया तथा धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना और पीएम जनमन योजना के माध्यम से विशेष पिछड़ी जनजातियों के समग्र विकास की दिशा में ठोस पहल की है।

उन्होंने कहा कि यह पूरे देश और छत्तीसगढ़ के लिए गर्व की बात है कि आज देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आदिवासी समाज की बेटी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आसीन हैं और छत्तीसगढ़ का नेतृत्व भी आदिवासी समाज से आने वाले मुख्यमंत्री के हाथों में है। धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना के लिए केंद्र सरकार द्वारा 80 हजार करोड़ रुपये तथा पीएम जनमन योजना के लिए 24 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे छत्तीसगढ़ के 6,691 गांव लाभान्वित हो रहे हैं। पहाड़ी कोरवा, बिरहोर सहित अन्य पीवीटीजी समुदायों के उत्थान के लिए विशेष योजनाएं संचालित की जा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासी अंचलों में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है। राज्य सरकार ने प्राधिकरण का गठन कर आदिवासी और पिछड़े क्षेत्रों में विकास कार्यों को और अधिक गति देने का निर्णय लिया है। उन्होंने वनवासी कल्याण आश्रम के कार्यक्रम में शामिल होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने स्वयं भी इस संगठन में कार्यकर्ता के रूप में कार्य किया है।

उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज प्राचीन काल से भगवान गौरा-गौरी के रूप में शिव-पार्वती का उपासक रहा है। समाज के महापुरुषों के योगदान को संरक्षित करने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए नवा रायपुर में विशाल डिजिटल जनजातीय संग्रहालय की स्थापना की गई है, जहां जनजातीय महापुरुषों की गाथाओं का सचित्र वर्णन उपलब्ध है।

मुख्यमंत्री ने जनजातीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बैगा, गुनिया और सिरहा को प्रतिवर्ष 5,000 रुपये की सम्मान निधि देने की घोषणा की। साथ ही सरना स्थलों के संरक्षण की भी घोषणा की गई, जिससे सांस्कृतिक संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक सशक्तिकरण को भी बढ़ावा मिलेगा।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने कहा कि गौरा-गौरी पूजा आज भी गांव-गांव में आस्था का केंद्र है और बैगा समाज पारंपरिक धार्मिक गतिविधियों के संवाहक हैं। उन्होंने बताया कि कोरबा जिले में अनेक प्राचीन देवी-देवताओं के स्थल हैं, जिन्हें विकसित कर पर्यटन के रूप में पहचान दिलाई जा रही है। उन्होंने आईटीआई चौक से बालको मार्ग को ‘जनजातीय गौरव पथ’ नाम देने और इस मार्ग पर जनजातीय महापुरुषों की प्रतिमाएं स्थापित करने की मांग रखी।

कार्यक्रम में कटघोरा विधायक प्रेमचंद पटेल, वनवासी कल्याण आश्रम के पदाधिकारी पनतराम भगत और बीरबल सिंह, महापौर संजू देवी राजपूत, पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर, आईजी संजीव शुक्ला, कलेक्टर कुणाल दुदावत, एसपी सिद्धार्थ तिवारी सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कार्यक्रम के दौरान आईटीआई चौक से बालको रोड का नाम ‘जनजातीय गौरव पथ’ रखने की घोषणा की। उन्होंने इस मार्ग के प्रारंभिक बिंदु पर जनजातीय महापुरुषों की जानकारी सहित प्रतिमाएं स्थापित करने की भी घोषणा की।

हिन्दुस्थान समाचार/ हरीश तिवारी

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हिन्दुस्थान समाचार / हरीश तिवारी

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