रागी की खेती से समृद्धि की नई मिसाल बनी शकुन बाई कुजांम

WhatsApp Channel Join Now
रागी की खेती से समृद्धि की नई मिसाल बनी शकुन बाई कुजांम


रागी की खेती से समृद्धि की नई मिसाल बनी शकुन बाई कुजांम


रागी की खेती से समृद्धि की नई मिसाल बनी शकुन बाई कुजांम


धमतरी, 03 अप्रैल (हि.स.)। धमतरी विकासखंड के ग्राम उरपुटी की कृषक शकुन बाई कुजांम ने यह साबित कर दिया है कि अगर परंपरागत खेती में आधुनिक तकनीकों का समावेश किया जाए, तो सीमित संसाधनों में भी बेहतर आमदनी संभव है। अपनी मेहनत, लगन और वैज्ञानिक खेती के जरिए उन्होंने सफलता की ऐसी कहानी लिखी है, जो पूरे जिले के किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है।

करीब 7 एकड़ कृषि भूमि पर खेती करने वाली शकुन बाई ने आधुनिक कृषि यंत्रों—ट्रैक्टर, रोटावेटर, सीड ड्रिल, मल्टी क्रॉप थ्रेसर और रीपर—का उपयोग कर खेती को पूरी तरह व्यवस्थित बनाया है। परिवार के पांच सदस्यों के सहयोग से वे खेती को बेहतर तरीके से संचालित कर रही हैं। रबी सीजन में उन्होंने 3 एकड़ में लघु धान्य फसल रागी (छत्तीसगढ़ रागी-2) की खेती की। बीजोपचार के लिए बीजामृत और खाद के रूप में वर्मी कम्पोस्ट, डीएपी, पीएसबी और केएसबी का उपयोग कर उन्होंने वैज्ञानिक पद्धति अपनाई। इसका परिणाम यह रहा कि उन्हें 28.50 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ। कुछ वर्ष पहले बीज उत्पादन कार्यक्रम के तहत रागी की फसल से उन्हें 5200 रुपये प्रति क्विंटल की दर से कुल 1,48,200 रुपये की आय हुई। लगभग 27,000 रुपये की लागत के मुकाबले 1,21,200 रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त कर उन्होंने खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदल दिया। कृषि विभाग के ‘आत्मा’ (ATMA) कार्यक्रम से मिले मार्गदर्शन ने उनकी सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। फसल चक्र परिवर्तन और लघु धान्य फसलों को अपनाकर उन्होंने उत्पादन और आय दोनों में वृद्धि की। फसल कटाई के बाद ग्रीष्मकालीन जुताई कर वे भूमि की उर्वरता भी बनाए रखती हैं। उनकी इस उपलब्धि से प्रभावित होकर कलेक्टर अबिनाश मिश्रा स्वयं उनके घर पहुंचे और खेती-किसानी की जानकारी ली। उन्होंने शकुन बाई के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें जिले के अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बताया। इस अवसर पर शकुन बाई ने अपनी बाड़ी में उगाए गए मुनगा (सहजन) भेंट किए और पारंपरिक पत्तल-दोना में ‘मड़िया पेय’ से अतिथियों का आत्मीय स्वागत किया। यह दृश्य ग्रामीण संस्कृति और आत्मनिर्भरता की सुंदर झलक प्रस्तुत करता है। शकुन बाई कुजांम की यह सफलता कहानी बताती है कि आधुनिक तकनीक और पारंपरिक ज्ञान का समन्वय किसानों के जीवन में समृद्धि ला सकता है। उनकी मेहनत ने न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ किया है, बल्कि क्षेत्र के अन्य किसानों को भी नई दिशा दिखाने का काम किया है।

हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा

Share this story