भगवान गणेश के अखंड जलाभिषेक का हुआ समापन
मंगल कामना को लेकर श्रद्धालुओं ने किया जल अर्पित
धमतरी, 14 सितंबर (हि.स.)l सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय, जनकल्याण और सनातन संस्कृति संरक्षण की भावना से मन मंदिर चौक स्थित गणेश मंदिर में भगवान सिद्धिविनायक गणेश का 24 घंटे का अखंड जलाभिषेक किया गया।
13 सितंबर से प्रारंभ हुए जलाभिषेक का समापन 14 सितंबर की सुबह छह बजे हुआ। इस दौरान श्रद्धालुओं ने बारी-बारी से भगवान गणेश को जल अर्पित कर सुख-समृद्धि, मंगल और विघ्न-बाधाओं से मुक्ति की कामना की।
अखंड जलाभिषेक के समापन के बाद मंदिर परिसर में हवन-पूजन का आयोजन हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं ने आहुति दी। गणपति अथर्वशीर्ष का अनवरत पाठ पं. श्रीकांत तिवारी, पं. कामेश्वर पाण्डेय, पं. नरेश धर दीवान, पं. चिराग धर दीवान, पं. वैभव धर दीवान, पं. नितिन दीवान और पं. सुरेंद्र पाण्डेय ने किया। मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष रोहिताश मिश्रा के मार्गदर्शन में मुख्य पुजारी आचार्य पं. होमन प्रसाद शास्त्री एवं सहयोगी वैदिक ब्राह्मणों ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कराई। इसके बाद श्रद्धालुओं को प्रसादी का वितरण किया गया।
मुख्य पुजारी आचार्य पं. होमन प्रसाद शास्त्री ने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान गणेश को जल अर्पित करने से मन की शांति, बुद्धि की स्थिरता और अहंकार का नाश होता है तथा विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं। जलाभिषेक में महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उन्होंने बताया कि इस वर्ष तीज व्रत और गणेश पूजा के अवसर पर विशेष ज्योतिषीय संयोग बना है। ब्रह्म योग और मुद्गल योग को शुभ माना गया है। ब्रह्म योग ज्योतिष के 27 योगों में 25वां योग है, जिसे ज्ञान, बुद्धि और शांति का प्रतीक माना जाता है। वहीं मुद्गल योग का संबंध भगवान गणेश और मुद्गल ऋषि द्वारा रचित मुद्गल पुराण से जोड़ा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह योग संकटों के निवारण और शुभ फल प्रदान करने वाला माना गया है। श्रद्धालुओं ने भगवान गणेश की आराधना कर परिवार की सुख-समृद्धि और जीवन में आने वाले सभी विघ्नों के निवारण की कामना की।
हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा

