एमसीबी : बिना अनुमति गायब शिक्षक पर होगी कार्रवाई, जिला शिक्षा अधिकारी ने जारी किया अंतिम नोटिस

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एमसीबी : बिना अनुमति गायब शिक्षक पर होगी कार्रवाई, जिला शिक्षा अधिकारी ने जारी किया अंतिम नोटिस


मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, 07 जुलाई (हि.स.)। शासकीय कार्यों में अनुशासन और नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। इसी कड़ी में जिला शिक्षा अधिकारी मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर ने लगातार बिना अनुमति के ड्यूटी से नदारद रहने वाले एक सहायक शिक्षक के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए अंतिम कारण बताओ नोटिस जारी किया है। विभाग ने साफ कर दिया है कि यदि आगामी 15 दिनों के भीतर शिक्षक द्वारा कोई संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया, तो उनकी सेवा समाप्त कर दी जाएगी।

विभागीय आदेश के अनुसार, शासकीय प्राथमिक शाला रामानुजनगर में पदस्थ सहायक शिक्षक नितेश कुमार पाण्डे 20 सितंबर 2024 से बिना किसी सक्षम अनुमति के लगातार अपने कर्तव्य से अनुपस्थित चल रहे हैं। यह कोई पहला मौका नहीं है जब शिक्षक को सुधरने का अवसर दिया गया हो। इससे पहले भी विभाग द्वारा उन्हें 12 अगस्त 2025, 11 सितंबर 2025 और हाल ही में 2 जून 2026 को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था। इसके बावजूद उन्होंने न तो कार्यालय में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखा और न ही इस लंबी अनुपस्थिति का कोई वैध कारण या संतोषजनक स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया।

मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी सामने आया है कि संबंधित शिक्षक ने 10 फरवरी 2026 को अध्ययन अवकाश के लिए एक आवेदन प्रस्तुत किया था। हालांकि, सक्षम प्राधिकारी द्वारा उनके इस आवेदन को नियमानुसार अस्वीकृत कर दिया गया था। आवेदन निरस्त होने के बाद भी उनका लगातार ड्यूटी पर न आना छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियमों का खुला उल्लंघन है। शासन के प्रचलित नियमों के तहत, जब तक अवकाश आधिकारिक रूप से स्वीकृत न हो जाए, तब तक ड्यूटी से गायब रहना गंभीर अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है और ऐसी अनधिकृत अवधि को सेवा अवधि में भी नहीं जोड़ा जाता।

अब पानी सिर से ऊपर जाते देख जिला शिक्षा अधिकारी ने इस मामले में अंतिम और कड़ी चेतावनी जारी की है। शिक्षक नितेश कुमार पाण्डे को निर्देशित किया गया है कि वे 15 दिनों के भीतर अपना लिखित स्पष्टीकरण विभाग के समक्ष प्रस्तुत करें। यदि तय समय-सीमा के भीतर जवाब नहीं मिलता या फिर दिया गया स्पष्टीकरण असंतोषजनक पाया जाता है, तो छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के प्रावधानों के तहत इसे गंभीर कदाचार माना जाएगा। ऐसी स्थिति में विभाग बिना कोई और मौका दिए एकपक्षीय कार्रवाई करते हुए संबंधित शिक्षक की सेवा समाप्ति का कदम उठाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / पारस नाथ सिंह

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