स्वर्गधाम सेवा समिति ने 717 अनजान आत्माओं का किया तर्पण और पिंडदान
न कोई अपना, न कोई पहचान, फिर भी पूरे विधि-विधान से किया श्राद्ध; स्वर्गधाम सेवा समिति ने पेश की मानवता की मिसाल
धमतरी, 10 अक्टूबर (हि.स.)। सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या पर स्वर्गधाम सेवा समिति ने मानवता और संवेदनशीलता की अनूठी मिसाल पेश करते हुए शनिवार को 717 अज्ञात मृतकों का तर्पण और सामूहिक पिंडदान किया। चित्रोत्पला गंगा के तट पर स्थित रुद्रेश्वर धाम में शनिवार को आयोजित इस कार्यक्रम में उन अनजान आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की गई, जिनका दुनिया में कोई अपना नहीं था और न ही जिनकी कोई पहचान सामने आ सकी।
सुबह 10 बजे पूजा-अर्चना के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। पंडित रामअवतार तिवारी ने हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार विधि-विधान से पूजन कराया। इसके बाद सामूहिक पिंडदान कर नदी में तर्पण किया गया। जिन मृतकों को अंतिम विदाई देने के लिए कोई परिजन मौजूद नहीं था, उनके लिए समिति ने अपनेपन और सामाजिक उत्तरदायित्व का परिचय देते हुए धार्मिक परंपराओं के अनुरूप श्राद्ध कर्म संपन्न किया। कार्यक्रम का संचालन अर्जुनपुरी गोस्वामी ने किया।
इस अवसर पर सियाराम साहू, गौकरण सिन्हा, राजू कस्तवार, दिलीपराज सोनी, गोलू रणसिंह, रुपेश शांडिल्य, कृपाशंकर मिश्रा, कमलेश कोठारी, शाहिद रजा, संजय यादव, चंपालाल साहू, विनीता पवार, वंदना पवार, उषा श्रीवास्तव, जगजीवन सिंह सिद्धू, तीरथराज फूटान, अमनगिरी गोस्वामी, किशोर, कैलाश सोनी, विशाल गौरी, विकास शर्मा, सुनीता पवार, डॉ. रविकिरण शिंदे, डॉ. राकेश सोनी और महेश रोहरा सहित अन्य लोग उपस्थित थे।
तर्पण पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का माध्यम
समिति के अध्यक्ष एवंत गोलछा और महासचिव अशोक पवार ने पितृ पक्ष के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इन 16 दिनों को केवल शोक या कर्मकांड तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि इसे पूर्वजों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने के अवसर के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने बताया कि इस वर्ष संस्था ने 717 अज्ञात मृतकों का तर्पण और पिंडदान कर सामाजिक संवेदनशीलता का परिचय दिया है। हिंदू धर्म में पितरों की तृप्ति के लिए जल और भोजन अर्पित करने का विशेष विधान है। उन्होंने कहा कि गाय, श्वान और कौवे जैसे जीवों की सेवा करने वाले समाजसेवियों का सम्मान करना भी सराहनीय पहल है। तर्पण का वास्तविक अर्थ पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना है। इससे मन को शांति और सकारात्मकता मिलती है तथा समाज में सभी प्राणियों के प्रति समरसता और सद्भाव की भावना मजबूत होती है।
20 वर्षों से अज्ञात मृतकों के लिए कर रही सेवा
लेप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. रोशन उपाध्याय ने कहा कि हिंदू धर्म में 16 संस्कारों का उल्लेख है और पितरों का तर्पण करना भी पारिवारिक परंपरा एवं धार्मिक कर्तव्यों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि पितरों के निमित्त तर्पण में सूर्य, अग्नि और जल का विशेष महत्व माना गया है। तर्पण और श्राद्ध के माध्यम से पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की जाती है। डॉ. उपाध्याय ने कहा कि वह पिछले 20 वर्षों से देख रहे हैं कि स्वर्गधाम सेवा समिति अज्ञात शवों का अंतिम संस्कार करने के साथ ही पितृमोक्ष अमावस्या पर ज्ञात-अज्ञात पितरों का सामूहिक श्राद्ध करती आ रही है। यह संस्था सनातन परंपराओं के निर्वहन के साथ समाज के प्रति अपने दायित्व को भी निभा रही है। उन्होंने कहा कि इस पर्व पर प्रत्येक व्यक्ति को अपने पितरों से भावनात्मक रूप से जुड़कर उनका तर्पण, मार्जन और श्राद्ध करना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इससे पितरों को तृप्ति मिलती है और परिजनों को उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।
हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा

