सुकमा पुलिस के जवान पूवर्ती गांव में बच्चों के साथ मनाई छोटी दिपावली

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सुकमा पुलिस के जवान पूवर्ती गांव में बच्चों के साथ मनाई छोटी दिपावली


सुकमा पुलिस के जवान पूवर्ती गांव में बच्चों के साथ मनाई छोटी दिपावली


सुकमा, 08 नवंबर (हि.स.)। कभी नक्सलियों के खौफ से सहमे रहने वाले बस्तर के पूवर्ती गांव में अब खुशियों के दीप जल रहे हैं। नक्सली कमांडर माड़वी हिड़मा के प्रभाव वाले इस गांव में कभी बच्चे घरों से बाहर निकलने तक से डरते थे और सरकारी आयोजन भी नहीं होते थे। लेकिन 31 मार्च 2026 के बाद गांव की तस्वीर तेजी से बदल रही है। अब बच्चे स्कूल जा रहे हैं और ग्रामीण भी त्योहारों की खुशियों में शामिल हो रहे हैं। इसी कड़ी में दिवाली से एक दिन पहले सुकमा पुलिस के जवानों ने पूवर्ती गांव पहुंचकर बच्चों और ग्रामीणों के साथ छोटी दिवाली मनाई।

पुलिस अधीक्षक मयंक गुर्जर के निर्देश पर आयोजित इस कार्यक्रम के तहत पुलिस ने सामुदायिक पहल 'निवा दुवड ते' (आपके द्वार) के माध्यम से ग्रामीणों के बीच पहुंचकर खुशियां साझा कीं। जवानों ने बच्चों को मिठाई, पटाखे और उपहार वितरित किए। वहीं ग्रामीणों को भी कपड़े और अन्य जरूरी सामान दिए गए। महिलाओं को साड़ियां तथा पुरुषों को पारंपरिक लुंगियां वितरित की गईं। उपहार पाकर ग्रामीणों और बच्चों के चेहरों पर खुशी साफ नजर आई।

कार्यक्रम के दौरान बच्चों के मनोरंजन के लिए गांव में मिकी माउस के झूले भी लगाए गए। लंबे समय तक भय और असुरक्षा के माहौल में रहे गांव के बच्चों ने झूलों का आनंद लिया और पटाखे फोड़कर दिवाली की खुशियां मनाईं।

पुलिस जवानों ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि पुलिस उनकी मदद और सुरक्षा के लिए हमेशा तत्पर है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण पुलिस से भयभीत न हों, बल्कि उसे समाज के एक सहयोगी और मददगार हिस्से के रूप में देखें। इस पहल का उद्देश्य पुलिस और ग्रामीणों के बीच विश्वास तथा आपसी संवाद को मजबूत करना है।

कार्यक्रम में एसडीओपी प्रभात पटेल और थाना प्रभारी परशुराम पैकरा ने ग्रामीणों से बातचीत की। उन्होंने क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और विकास के लिए पुलिस की प्रतिबद्धता दोहराते हुए ग्रामीणों को निरंतर सहयोग और सुरक्षा का भरोसा दिलाया।

इस आयोजन की सबसे खास बात यह रही कि ग्रामीणों, पुलिस जवानों और आत्मसमर्पित नक्सलियों ने एक साथ दीपावली की खुशियां साझा कीं। पूवर्ती में एक साथ त्योहार मनाते लोगों की यह तस्वीर बताती है कि संवाद, विश्वास और सकारात्मक पहल के जरिए कभी नक्सलवाद के प्रभाव में रहे दूरस्थ इलाकों में भी सामाजिक सौहार्द और खुशहाली की नई शुरुआत हो सकती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे

Livevns.news Desk
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