धमतरी : धार्मिक आस्था और परंपरा का प्रतीक बनी शक्कर की माला

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धमतरी : धार्मिक आस्था और परंपरा का प्रतीक बनी शक्कर की माला


धमतरी, 03 मार्च (हि.स.)। रंगों के महापर्व होली में शहर का बाजार पूरी तरह उत्सव के रंग में रंग गया है। जहां एक ओर रंग, गुलाल और पिचकारियों की दुकानों पर भीड़ उमड़ रही है, वहीं दूसरी ओर पारंपरिक हरवा माला ने भी लोगों का खास ध्यान खींचा है। शक्कर की चासनी से तैयार यह माला इन दिनों चौक-चौराहों और बाजारों में आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। नगाड़ों की थाप और होली गीतों के बीच बाजारों में सजी हरवा मालाएं बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को लुभा रही हैं। गले में पहनने वाली यह मीठी माला न सिर्फ स्वाद का आनंद देती है, बल्कि परंपरा और प्रेम का प्रतीक भी मानी जाती है।

हरवा माला विक्रेता चेतन साहू ने बताया कि इस वर्ष हरवा माला 200 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रही है, जबकि एक माला 20 रुपये नग में उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि त्योहार नजदीक आते ही इसकी मांग और बढ़ गई है। खासकर बच्चे इसे बड़े उत्साह से खरीद रहे हैं।विप्र विदवत परिषद के सदस्य पंडित राजकुमार तिवारी ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार मान्यता है कि होली के दिन हरवा माला पहनने से आपसी प्रेम, मिठास और सौहार्द में वृद्धि होती है। यह बुराई पर अच्छाई की विजय के संदेश को आत्मसात करने का प्रतीक मानी जाती है। धमतरी का बाजार रंगों के साथ-साथ परंपराओं की मिठास से भी सराबोर नजर आ रहा है। होली की मस्ती में घुली हरवा माला की मिठास पर्व के उल्लास को और भी खास बना रही है।

हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा

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