जनजातीय कारीगरों के हुनर को मिलेगा राष्ट्रीय बाजार, ट्राइफेड से जुड़कर बनाएंगे नई पहचान

WhatsApp Channel Join Now
जनजातीय कारीगरों के हुनर को मिलेगा राष्ट्रीय बाजार, ट्राइफेड से जुड़कर बनाएंगे नई पहचान


धमतरी, 21 अगस्त (हि.स.)। जिले के जनजातीय कारीगरों, कलाकारों और उद्यमियों के पारंपरिक हुनर को अब स्थानीय बाजार से आगे राज्य और राष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की दिशा में जिला प्रशासन ने कदम बढ़ाया है। कारीगरों को बेहतर बाजार, पहचान, विपणन और आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुक्रवार को लाइवलीहुड कालेज में एक दिवसीय ‘जनजातीय कारीगर सूचीबद्धता मेला’ आयोजित किया गया। मेले में 20 कलाकारों एवं कारीगरों ने अपने उत्पादों के स्टाल लगाए।

पात्र कारीगरों, स्वयं सहायता समूहों, वन धन विकास केंद्रों, किसान उत्पादक संगठनों और जनजातीय उद्यमियों को ट्राइफेड से सूचीबद्ध होने का अवसर दिया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष अरुण सार्वा ने कहा कि जिला प्रशासन की यह पहल जनजातीय कलाकारों को अपनी कला और हुनर प्रदर्शित करने के लिए प्रभावी मंच उपलब्ध कराएगी। ट्राइफेड से सूचीबद्ध होने के बाद कारीगर राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनियों, ‘जनजातीय भारत’ बिक्री केंद्रों, मेलों और विभिन्न विपणन गतिविधियों में भाग ले सकेंगे। इससे स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार और कारीगरों को आय के नए अवसर मिलेंगे।

कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कहा कि आजीविका से जुड़ी गतिविधियां केवल आय का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम भी हैं। प्रशासन का प्रयास है कि जनजातीय समाज की पारंपरिक कला, कौशल और प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित उत्पादों को आधुनिक बाजार से जोड़ा जाए। उन्होंने कारीगरों से सोशल मीडिया और इंटरनेट का प्रभावी उपयोग कर अपने उत्पादों को देश-दुनिया तक पहुंचाने की अपील की। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से कारीगर सीधे ग्राहकों तक पहुंच बना सकते हैं और अपने उत्पादों की बाजार क्षमता बढ़ा सकते हैं। कलेक्टर ने जिले की भौगोलिक स्थिति और वन उपज की प्रचुर उपलब्धता का उल्लेख करते हुए युवाओं को प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग और आकर्षक पैकेजिंग पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी।

उन्होंने कहा कि आयुर्वेदिक और ऑर्गेनिक उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। नगरी क्षेत्र में उपलब्ध सतावर के साथ लाख, इमली और अन्य वन उपज का वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित प्रसंस्करण कर बेहतर आय अर्जित की जा सकती है। उन्होंने युवाओं और जनजातीय समाज के लोगों को प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना सहित उद्योग विभाग की विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। कलेक्टर ने यह भी कहा कि जिले के जनजातीय कारीगरों का विशेष बैच तैयार कर उन्हें सोशल मीडिया मार्केटिंग, ब्रांडिंग, पैकेजिंग, बाजार प्रबंधन और उत्पाद प्रस्तुतीकरण का प्रशिक्षण दिलाया जाएगा, ताकि पारंपरिक कौशल को आधुनिक उद्यमिता से जोड़ा जा सके। सर्व आदिवासी समाज के अध्यक्ष जे.एल. ध्रुव ने कहा कि जनजातीय समाज की समृद्ध संस्कृति, परंपरा, कला और शिल्प शैली को उचित बाजार और मार्केट लिंकेज मिलने से कारीगरों की आय और जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार हो सकता है। इससे जिले की पारंपरिक कला को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान भी मिलेगी। मेले में अतिथियों और अधिकारियों ने कारीगरों द्वारा तैयार उत्पादों का अवलोकन किया तथा उनके काम, उत्पादों की मांग, बाजार की उपलब्धता और आय के संबंध में जानकारी ली।

कार्यक्रम में उप संचालक कृषि मोनेश साहू, उप संचालक पंचायत नकुल वर्मा, सहायक संचालक आजीविका संदीप गन्नाडे, उद्योग विभाग के सहायक प्रबंधक प्रशांत चंद्राकर एवं एक्का सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और समाज के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

स्टाल में प्रदर्शित किए गए विभिन्न उत्पाद

स्टालों में वस्त्र एवं हस्तकला, धातु शिल्प, जैविक एवं प्राकृतिक उत्पाद, मिट्टी शिल्प, बांस एवं बेंत शिल्प, जनजातीय आभूषण, उपहार एवं उपयोगी सामग्री तथा चित्रकला सहित विभिन्न उत्पाद प्रदर्शित किए गए। सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विमल साहू ने कहा कि यह मेला जिले के जनजातीय कारीगरों एवं उद्यमियों को ट्राइफेड के व्यापक विपणन नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने पात्र कारीगरों, स्वयं सहायता समूहों, वन धन विकास केंद्रों, किसान उत्पादक संगठनों और जनजातीय उद्यमियों से ऐसे अवसरों का लाभ उठाने की अपील की।

हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा

Share this story