11 दिनों बाद श्री जगन्नाथ की भव्य घर वापसी, जयघोष और श्रद्धा से गूंजा धमतरी

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11 दिनों बाद श्री जगन्नाथ की भव्य घर वापसी, जयघोष और श्रद्धा से गूंजा धमतरी


11 दिनों बाद श्री जगन्नाथ की भव्य घर वापसी, जयघोष और श्रद्धा से गूंजा धमतरी


धमतरी, 27 जुलाई (हि.स.)। भगवान श्री जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की पावन बहुदा यात्रा (रथयात्रा वापसी) साेमवार को श्रद्धा, आस्था और उल्लास के बीच संपन्न हुई। 11 दिनों तक मौसी के घर प्रवास के बाद भगवान की मुख्य मंदिर में वापसी पर पूरा शहर भक्तिमय वातावरण में डूब गया।

रिमझिम फुहारों के बीच राष्ट्रीय गौशाला बिलाईमाता मंदिर से निकली भव्य शोभायात्रा श्रीजगदीश मंदिर पहुंची, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालु पूरे उत्साह के साथ शामिल हुए। यात्रा मार्ग में विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर भगवान का स्वागत किया और जगन्नाथ के जयघोष से माहौल भक्तिमय बना रहा।

सनातन परंपरा के अनुसार भगवान श्री जगन्नाथ वर्ष में एक बार अपने भक्तों को दर्शन देने और उनका कुशलक्षेम जानने के लिए मौसी के घर जाते हैं। 11 दिनों के विश्राम के बाद उनकी मूल मंदिर में वापसी को बहुदा यात्रा कहा जाता है। मान्यता है कि इस अवसर पर भगवान के रथ को खींचने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है तथा भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। श्री जगदीश मंदिर पहुंचने पर भगवान श्री जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भव्य स्वागत किया गया। इसके बाद विशेष पूजा-अर्चना, महाआरती और महाप्रसाद वितरण का आयोजन हुआ। धार्मिक अनुष्ठान पंडित बालकृष्ण शर्मा एवं गौरव शर्मा के सान्निध्य में संपन्न हुए।

श्री जगदीश मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष किरण कुमार गांधी ने कहा कि भगवान श्री जगन्नाथ की रथयात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, सेवा, भाईचारे और मानव कल्याण का संदेश देने वाला महापर्व है। उन्होंने बताया कि धमतरी में यह परंपरा वर्षों से धार्मिक आस्था और सामाजिक एकता का प्रतीक बनी हुई है, जिसमें हर समाज और वर्ग के लोग बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं। इस वर्ष भी रथयात्रा वापसी को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।

रथयात्रा की व्यवस्थाओं और सेवा कार्य में अखिल भारत गुजराती समाज के सदस्य प्रतीश गांधी सहित ट्रस्ट के उपाध्यक्ष सत्यनारायण राठी, सचिव प्रकाश गांधी, सहसचिव मोहन अग्रवाल, कोषाध्यक्ष लखमशी भानुशाली, ट्रस्टी श्यामसुंदर अग्रवाल, डॉ. हीरा महावर, श्याम अग्रवाल, हर्षद मेहता, गोपाल शर्मा, लक्ष्मीचंद बाहेती, अजय अग्रवाल, विपिन पटेल, मदनमोहन खंडेलवाल, बिहारीलाल अग्रवाल, प्रियंक गांधी, राकेश चंदवानी, दुश्यंत, वेदांत खंडेलवाल, दयाराम अग्रवाल, रमेश लाट सहित बड़ी संख्या में समाजसेवियों एवं स्वयंसेवकों ने योगदान दिया।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा

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