शेडनेट हाउस से बदली खेती की तस्वीर, जितेन्द्र पाण्डेय ने सब्जी उत्पादन से बढ़ाया मुनाफा

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शेडनेट हाउस से बदली खेती की तस्वीर, जितेन्द्र पाण्डेय ने सब्जी उत्पादन से बढ़ाया मुनाफा


जांजगीर, 6 अक्टूबर (हि.स.)। खेती में आधुनिक तकनीक और सहीर्गदर्शन का साथ मिले तो किसान पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर बेहतर आमदनी हासिल कर सकते हैं। जांजगीर-चांपा जिले के पामगढ़ विकासखंड के ग्राम हड़हा निवासी किसान जितेन्द्र पाण्डेय ने संरक्षित खेती को अपनाकर इसका उदाहरण पेश किया है।

जितेन्द्र पाण्डेय पहले खुले खेत में पारंपरिक तरीके से सब्जियों की खेती करते थे। खुले में खेती के दौरान फसल में कीट और रोगों का प्रकोप अधिक होने से फसल सुरक्षा पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ता था। इससे उत्पादन लागत बढ़ने के साथ फसल की गुणवत्ता भी प्रभावित होती थी।

उद्यान विभाग से तकनीकी जानकारी और मार्गदर्शन मिलने के बाद जितेन्द्र ने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत शेडनेट हाउस स्थापित किया। इसके बाद उन्होंने संरक्षित वातावरण में बैंगन और खीरा की खेती शुरू की।

शेडनेट हाउस में फसलों को अनुकूल वातावरण मिलने से कीट एवं रोगों का प्रकोप अपेक्षाकृत कम हुआ। इससे कृषि आदानों और फसल सुरक्षा पर होने वाले खर्च में कमी आई। साथ ही सब्जियों की गुणवत्ता और उत्पादन में भी सुधार हुआ।

किसान जितेन्द्र पाण्डेय का कहना है कि आधुनिक तकनीक अपनाने से उन्हें पारंपरिक खेती की तुलना में बेहतर आर्थिक लाभ मिल रहा है। शेडनेट हाउस ने खेती को अधिक व्यवस्थित करने के साथ उत्पादन के जोखिम को भी कम किया है।

जितेन्द्र की सफलता आसपास के किसानों को भी संरक्षित खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है। उनकी कहानी बताती है कि मेहनत के साथ आधुनिक तकनीक और शासन की योजनाओं का सहयोग मिले तो खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ आजीविका का माध्यम बनाया जा सकता है।

हिन्दुस्थान समाचार/ लालिमा शुक्ला पुरोहित

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हिन्दुस्थान समाचार / LALIMA SHUKLA PUROHIT

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