रामानुजगंज में सात दिवसीय रामलीला महोत्सव शुरू, मिर्जापुर के कलाकारों की प्रस्तुति देखने उमड़ रहे दर्शक
बलरामपुर, 25 अक्टूबर (हि.स.)। बलरामपुर जिले के रामानुजगंज के गांधी मैदान में सात दिवसीय रामलीला महोत्सव का बीते शाम शुभारंभ हो गया है। उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर से पहुंचे कलाकारों ने पहले दिन रामायण के प्रसंगों का मंचन कर दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। मंच पर कलाकारों के अभिनय और संवादों को लोगों ने खूब सराहा।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में दर्शक पहुंच रहे हैं। मंडली के कलाकार अगले सात दिनों तक भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़ी घटनाओं को नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से लोगों के सामने रखेंगे। रामलीला महोत्सव में प्रतिदिन रामायण के अलग-अलग प्रसंगों की प्रस्तुति दी जाएगी। इसमें भगवान श्रीराम के जन्म, बाल्यकाल, युवावस्था, वनवास और उनके जीवन से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं को दिखाया जाएगा। कलाकारों ने इस आयोजन के माध्यम से रामायण की कथा और भगवान श्रीराम के आदर्शों को आम लोगों तक पहुंचाने की तैयारी की है। सात दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम में दर्शकों को रामकथा के विभिन्न पहलुओं को मंच पर देखने का अवसर मिलेगा।
मंडली के संचालक दिनेश कुमार चौरसिया ने बताया कि उनकी टीम हर वर्ष रामानुजगंज पहुंचकर रामलीला का मंचन करती है। इस बार भी सात दिवसीय आयोजन की शुरुआत हो चुकी है। उनकी मंडली छत्तीसगढ़ के बलरामपुर, रामानुजगंज, अंबिकापुर और लखनपुर सहित कई स्थानों पर रामलीला प्रस्तुत करती है। इसके अलावा दूसरे राज्यों में भी जाकर कलाकार अपनी प्रस्तुति देते हैं।
उन्होंने बताया कि मंडली के सदस्य अलग-अलग पात्रों की भूमिका निभाते हैं। कोई भगवान श्रीराम का किरदार निभाता है तो कोई रावण, राजा दशरथ और राजा जनक की भूमिका में नजर आता है। सात दिनों के भीतर रामायण के प्रमुख प्रसंगों को मंचन के माध्यम से पूरा करने का प्रयास किया जाता है।
रामलीला में व्यास की भूमिका निभा रहे विपिन द्विवेदी ने बताया कि मंडली के सदस्य पूरे साल अलग-अलग स्थानों पर जाकर रामलीला और श्रीराम कथा का आयोजन करते हैं। रामानुजगंज में भी हर वर्ष की तरह इस बार कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि मंडली के कलाकार ही भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, माता सीता, हनुमान, रावण, बाली और सुग्रीव जैसे पात्रों का अभिनय करते हैं। दर्शकों से मिलने वाली सराहना कलाकारों के लिए प्रोत्साहन का काम करती है। आयोजन के दौरान लोगों की ओर से मिलने वाले दान और सहयोग से कलाकार अपना तथा अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं।
रामलीला मंडली में संचालक दिनेश कुमार चौरसिया के साथ सुरेश कुमार चौरसिया, सुंदरम कुमार, राघव प्रसाद, बिपिन दुबे, राजेश चौरसिया, कमलेश आदिवासी, कमलेश चौरसिया, सूर्यभान गौतम और विजय कुमार शामिल हैं। सभी सदस्य अपनी-अपनी जिम्मेदारी के अनुसार मंच पर अलग-अलग किरदार निभाते हैं। सीमित संसाधनों के बीच यह टीम विभिन्न स्थानों पर पहुंचकर रामलीला का मंचन करती है।
काशी मिर्जापुर रामलीला मंडल के सदस्यों ने बताया कि रामलीला के आयोजन का उद्देश्य केवल अपनी कला का प्रदर्शन करना नहीं है। वे चाहते हैं कि आने वाली पीढ़ी भी भगवान श्रीराम के जीवन, उनके आदर्शों और भारतीय धार्मिक परंपराओं को समझे। रामायण के प्रसंगों को नाटक के रूप में प्रस्तुत करने से लोग इन कथाओं से आसानी से जुड़ पाते हैं। इसी उद्देश्य के साथ मंडली के सदस्य वर्षों से अलग-अलग क्षेत्रों में रामलीला का मंचन कर इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / विष्णु पांडेय

