एमसीबी: 184 क्विंटल धान बिक्री ने बदली जिंदगी, किसान अभय की मेहनत को मिला पूरा सम्मान

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एमसीबी: 184 क्विंटल धान बिक्री ने बदली जिंदगी, किसान अभय की मेहनत को मिला पूरा सम्मान


एमसीबी: 184 क्विंटल धान बिक्री ने बदली जिंदगी, किसान अभय की मेहनत को मिला पूरा सम्मान


मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, 12 जनवरी (हि.स.)। छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के दौरान लागू की गई पारदर्शी, सुगम और डिजिटल धान खरीदी व्यवस्था किसानों के लिए नई उम्मीद और विश्वास का आधार बन रही है। प्रदेश सरकार की किसान हितैषी नीतियों का लाभ अब सीधे खेतों और गांवों तक पहुंच रहा है। इसी बदली व्यवस्था की जमीनी सफलता की मिसाल मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर ग्राम कोड़ा निवासी किसान अभय कुमार पांडेय की प्रेरणादायक कहानी है। अभय कुमार पांडेय ने कोड़ा उपार्जन केंद्र में कुल 184 क्विंटल धान का सफलतापूर्वक विक्रय किया और अपनी मेहनत की पूरी कीमत प्राप्त की। शासन द्वारा निर्धारित 3100 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य तथा प्रति एकड़ 21 क्विंटल खरीदी की नीति ने उन्हें मजबूत आर्थिक संबल प्रदान किया। पहले जहां किसान अपनी उपज की कीमत को लेकर चिंतित रहते थे, वहीं इस वर्ष की व्यवस्था ने यह भरोसा दिलाया कि सरकार उनके हर दाने की सही कीमत दे रही है। अभय कुमार बताते हैं कि इतनी पारदर्शी व्यवस्था ने उन्हें अपनी खेती के भविष्य के प्रति आश्वस्त किया है और वे गर्व महसूस करते हैं कि उनकी मेहनत का सम्मान हो रहा है।

किसान अभय कुमार पांडेय को ऑफलाइन टोकन जारी किया गया था, जिसके अनुसार वे निर्धारित तिथि और समय पर कोड़ा उपार्जन केंद्र पहुंचे। पूर्व वर्षों में लंबी प्रतीक्षा, असुविधाजनक व्यवस्था और तौल में असमानता जैसी शिकायतें किसानों को परेशान करती थीं, लेकिन इस बार का अनुभव बिल्कुल अलग रहा। उपार्जन केंद्र में किसानों के लिए बैठने की समुचित व्यवस्था, पेयजल, छाया और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध थीं, जिससे किसानों को सम्मान और सुविधा का अनुभव हुआ। डिजिटल तौल कांटे से की गई सटीक तौल ने पूरी प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाया, जिससे किसी भी प्रकार के संदेह या विवाद की गुंजाइश नहीं रही। अभय कुमार पांडेय बताते हैं कि पहले तौल में अंतर और भुगतान में देरी उनकी सबसे बड़ी समस्या थी, परंतु इस वर्ष डिजिटल व्यवस्था के कारण उनका धान समय पर तौला गया, रिकॉर्ड तुरंत दर्ज हुआ और प्रक्रिया सरलता से पूरी हुई। उन्होंने कहा कि अब उन्हें न तो बार-बार केंद्र के चक्कर लगाने पड़ते हैं और न ही अपनी उपज के मूल्य को लेकर चिंता करनी पड़ती है। इस बदले अनुभव ने उनके मन में शासन और प्रशासन के प्रति विश्वास को और मजबूत कर दिया है।

आर्थिक मजबूती के साथ नई संभावनाओं का उज्ज्वल अध्याय

धान की बिक्री से प्राप्त राशि ने अभय कुमार पांडेय के जीवन में उल्लेखनीय परिवर्तन लाया है। इस आय से अब वे रबी फसल की बुवाई, उन्नत बीज और खाद की व्यवस्था, कृषि उपकरणों के रखरखाव के साथ-साथ बच्चों की शिक्षा और पारिवारिक आवश्यकताओं की योजनाएं निश्चिंत होकर बना पा रहे हैं। आर्थिक स्थिरता ने उनके अंदर नया आत्मविश्वास पैदा किया है और खेती को एक मजबूत और सम्मानजनक पेशे के रूप में अपनाने की प्रेरणा दी है। उन्होंने यह भी बताया कि पहले कर्ज, अनिश्चित मूल्य और भुगतान में देरी के कारण भविष्य की योजना बनाना कठिन हो जाता था, लेकिन इस वर्ष समय पर मिले समर्थन मूल्य ने उनके परिवार के चेहरों पर मुस्कान ला दी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में लागू किसान-केंद्रित नीतियां न केवल आय बढ़ा रही हैं, बल्कि किसानों के मन में सुरक्षा, सम्मान और भरोसे की भावना भी पैदा कर रही हैं। ग्राम कोड़ा निवासी किसान अभय कुमार पांडेय की यह सफलता कथा इस बात का प्रमाण है कि सही नीतियां जब जमीन पर ईमानदारी से लागू होती हैं तो वे किसानों के जीवन की दिशा और दशा दोनों बदल देती हैं। यह कहानी प्रदेश के हजारों किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो अब आत्मविश्वास के साथ खेती को एक मजबूत भविष्य की नींव मानते हुए आगे बढ़ रहे हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / पारस नाथ सिंह

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