मौत का कुआं नहीं बनेंगे खुले जलस्रोत, सरगुजा वन मंडल ने वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए उठायें बड़े कदम

WhatsApp Channel Join Now
मौत का कुआं नहीं बनेंगे खुले जलस्रोत, सरगुजा वन मंडल ने वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए उठायें बड़े कदम


अंबिकापुर, 02 जून (हि.स.)। सरगुजा वन मंडल ने वन्यजीव संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने की दिशा में एक बेहद सराहनीय और महत्वपूर्ण पहल की है। वन क्षेत्रों और उनके आसपास के रिहायशी इलाकों में स्थित खुले व असुरक्षित कुएं बेजुबान वन्यजीवों के लिए लगातार काल साबित हो रहे थे। इन खुले कुओं में गिरकर असमय दम तोड़ने वाले वन्यजीवों की बढ़ती घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए अब विभाग ने इन्हें पूरी तरह सुरक्षित करने का अभियान शुरू कर दिया है।

अक्सर जंगलों से भटककर आबादी की ओर आने वाले हाथी, तेंदुआ, भालू और हिरण जैसे वन्यजीव इन खुले कुओं को देख नहीं पाते और दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं। इस गंभीर खतरे को टालने के लिए वन विभाग द्वारा ऐसे सभी संवेदनशील और असुरक्षित कुओं को चिन्हित किया जा रहा है। पहचान के बाद इन कुओं को मजबूत लोहे की जाली, ढक्कन या अन्य उपयुक्त कंक्रीट संरचनाओं से ढका जा रहा है, ताकि वन्यजीवों का आवागमन सुरक्षित हो सके और भविष्य में ऐसी किसी भी अनहोनी की आशंका को खत्म किया जा सके।

सरगुजा के वनमंडलाधिकारी (डीएफओ) अभिषेक जोगावत ने मंगलवार काे बताया कि वन्यजीव हमारे प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र का एक अनिवार्य हिस्सा हैं और उनकी रक्षा करना हमारा परम कर्तव्य है। खुले कुएं घने जंगलों और ग्रामीण इलाकों में एक छिपे हुए मौत के जाल की तरह हैं। सरगुजा वन मंडल द्वारा चरणबद्ध तरीके से ऐसे सभी खतरनाक स्थलों को सुरक्षित किया जा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वन्यजीवों की दुर्घटनाओं में होने वाली अकारण मृत्यु को रोकना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है, और वन विभाग उनके अनुकूल व सुरक्षित आवास वातावरण तैयार करने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

इसके साथ ही, वनमंडलाधिकारी ने इस जीवन-रक्षक अभियान को धरातल पर सफल बनाने के लिए स्थानीय ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों से भी आगे आने की अपील की है। उन्होंने कहा कि वन्यजीव संरक्षण केवल किसी एक विभाग का काम नहीं बल्कि एक सामूहिक सामाजिक जिम्मेदारी है, और जनता के सक्रिय सहयोग से ही हम बेजुबानों को एक सुरक्षित भविष्य दे सकते हैं।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / पारस नाथ सिंह

Share this story