राजिम कुंभ कल्प मेला के मुख्य मंच पर नगरपालिका अध्यक्ष व डीएसपी ने दी देशभक्ति गीतों की प्रस्तुति

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राजिम कुंभ कल्प मेला के मुख्य मंच पर नगरपालिका अध्यक्ष व डीएसपी ने दी देशभक्ति गीतों की प्रस्तुति


राजिम कुंभ कल्प मेला के मुख्य मंच पर नगरपालिका अध्यक्ष व डीएसपी ने दी देशभक्ति गीतों की प्रस्तुति


-डॉ. पीसी लाल यादव के लोक कलामंच ने पुरानी यादें की ताजा

राजिम 05 फ़रवरी (हि.स.)। राजिम कुंभ कल्प मेला के मुख्य मंच पर चौथे दिन बुधवार की देर रात डॉ. पी.सी. यादव के नेतृत्व में दूध मोंगरा गंडई की लोक संस्कृति की शानदार प्रस्तुति से दर्शकों का दिल जीत लिया। चौथे दिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने दर्शकों को देशभक्ति, भक्ति और लोक संस्कृति की त्रिवेणी में डुबो दिया।

मुख्य मंच पर प्रारंभ में पंडवानी कलाकार विष्णु साहू परसट्टी ने किचक वध की कथा को कपालिका शैली में प्रस्तुत किया। एक हाथ में तमुरा और दूसरे हाथ के संकेतों से उन्होंने कथा को जीवंत रूप में दर्शकों तक पहुंचाया। प्रभावशाली गायन और अभिनय से प्रभावित होकर दर्शकों ने जमकर तालियां बजाईं।

कार्यक्रम में पहली बार ऐसा दृश्य देखने को मिला, जब नगरपालिका अध्यक्ष और डीएसपी ने स्वयं मुख्य मंच पर देशभक्ति गीतों की प्रस्तुति दी। नगर पालिका अध्यक्ष महेश यादव ने “अबकी बरस तुझे धरती की रानी कर देंगे...” गीत गाकर दर्शकों में देशभक्ति की भावना जगा दी। मंच पर डीएसपी गरियाबंद ने “देखे वीर जवानों अपने खून पर ये इल्जाम न आए..” गीत प्रस्तुत कर खूब तालियां बटोरीं। कार्यक्रम की अगली कड़ी में दिनेश्वर साहू ने “कोरी-कोरी नारियल चढ़े...” गीत से माहौल को धर्ममय बना दिया। कुंदन सोनी ने 1975 की लोकप्रिय फिल्मी गीत “गीत गाता चल, ओ साथी गुनगुनाता चल...” प्रस्तुत कर दर्शकों को भी गुनगुनाने पर मजबूर कर दिया।

इसके पश्चात धर्मेन्द्र शर्मा ने रिकॉर्डिंग संगीत पर “भोले ओ भोले मेरे यार को मना दे...” गाकर पूरे मंच और मेला परिसर को शिवमय बना दिया। किशोर निर्मलकर के “छोड़ेंगे न साथ हम भोले, मरते दम तक...” गीत ने दर्शकों को ऊर्जा और भक्ति से भर दिया। कार्यक्रम में दीपाली पाण्डेय ने कथक नृत्य के माध्यम से गणेश वंदना और राधा के विभिन्न स्वरूपों को पैरों की थाप और हाथों की मुद्राओं से सजीव किया। दर्शकों ने इस प्रस्तुति की जमकर सराहना की।

कार्यक्रम की अंतिम प्रस्तुति के रूप में डॉ. पीसी यादव के नेतृत्व में दूध मोंगरा, गंडई की लोकसंस्कृति की शानदार प्रस्तुति दी गई। “जय जय दुर्गा माता, जय छत्तीसगढ़ी महतारी...” से पूरा मंच गूंज उठा। लोकगीत “थईयां-थईयां नाचे लंगूरवा...” ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद बैगा जनजाति की ददरिया प्रस्तुति में “महुआं लाटा, कोला बाटीं...” गीत के माध्यम से जनजातीय रीति-रिवाजों को दर्शाया गया। कार्यक्रम की कड़ी को आगे बढ़ाते हुए पंथी नृत्य “गिरौदपुरी जाबो न...”, तथा विशेष लोकनाट्य “माटी महतारी” के माध्यम से पुरानी यादों को ताजा करते हुए छत्तीसगढ़ की सामाजिक समस्याओं को उजागर किया। कलाकारों का सम्मान स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने स्मृति चिन्ह और गुलदस्ता भेंटकर किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / गेवेन्द्र प्रसाद पटेल

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