बारिश का पानी सहेजकर गीताराम ने बढ़ाई आमदनी, डबरी बनी खेती और मछलीपालन का आधार

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बारिश का पानी सहेजकर गीताराम ने बढ़ाई आमदनी, डबरी बनी खेती और मछलीपालन का आधार


जांजगीर-चांपा, 6 अक्टूबर (हि. स.)। जल संरक्षण और सरकारी योजनाओं के बेहतर उपयोग से ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने की मिसाल जनपद पंचायत बम्हनीडीह के ग्राम पंचायत खपरीडीह के किसान गीताराम सिदार ने पेश की है। रोजगार गारंटी योजना के तहत उनके खेत में बनी निजी डबरी अब सिर्फ बारिश का पानी सहेजने का माध्यम नहीं, बल्कि खेती, सब्जी-बाड़ी, फल उत्पादन और मछलीपालन से अतिरिक्त आय का आधार बन गई है।

गीताराम के खेत में पहले सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं हो पाता था। बारिश का पानी बहकर निकल जाता था और वर्षा के बाद खेती के लिए पानी की समस्या बनी रहती थी। योजना की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने ग्राम रोजगार सहायक और तकनीकी सहायक की मदद से निजी डबरी निर्माण का प्रस्ताव ग्राम सभा में प्रस्तुत किया। प्रस्ताव स्वीकृत होने के बाद जिला पंचायत से डबरी निर्माण के लिए 2.21 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति मिली।

डबरी बनने के बाद बारिश का पानी खेत में ही संग्रहित होने लगा। इससे सिंचाई की समस्या काफी हद तक दूर हुई और गीताराम ने धान की खेती के साथ सब्जी-बाड़ी विकसित की। डबरी और खेत की मेड़ पर पपीता, केला सहित अन्य फलदार पौधे भी लगाए गए हैं।

इसके अलावा डबरी में मछलीपालन शुरू कर उन्होंने आय का एक और जरिया तैयार किया। परिवार के सदस्य भी खेती और अन्य गतिविधियों में सहयोग करते हैं। इनसे होने वाली आय का उपयोग बच्चों की शिक्षा और परिवार की जरूरतों को पूरा करने में किया जा रहा है।

गीताराम की कहानी बताती है कि जल संरक्षण, सरकारी योजनाओं का लाभ और किसान की मेहनत मिलकर ग्रामीण परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बना सकते हैं। एक निजी डबरी ने उनके लिए बारिश के पानी को सहेजने के साथ-साथ आय के कई नए रास्ते खोल दिए हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / LALIMA SHUKLA PUROHIT

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