रायगढ़ के शांभवी इस्पात के विस्तार पर 21 अप्रैल काे जनसुनवाई, स्थानीय लोगों में फैला असंतोष

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रायगढ़ के शांभवी इस्पात के विस्तार पर 21 अप्रैल काे जनसुनवाई, स्थानीय लोगों में फैला असंतोष


रायगढ़ 10 अप्रैल (हि.स.)। छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा विगत दिनाें जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार रायगढ़ जिले तमनार क्षेत्र में बड़े औद्याेगिक विस्तार की तैयारी काे उजागर कर दिया है। इस परियोजना के अंतर्गत स्पंज आयरन, पावर प्लांट, फेरो एलॉय एवं ब्रिक निर्माण इकाइयों के विस्तार की योजना शामिल है।

पर्यावास भवन, सेक्टर-19, नया रायपुर अटल नगर स्थित कार्यालय से जारी इस सूचना में मैसर्स शांभवी इस्पात प्राइवेट लिमिटेड द्वारा स्टील प्लांट के बड़े पैमाने पर विस्तार की योजना का उल्लेख है, जिसके तहत स्पंज आयरन, पावर प्लांट, फेरो एलॉय और ब्रिक निर्माण इकाइयों को बढ़ाया जाना प्रस्तावित है। इस परियोजना के लिए 21 अप्रैल को सुबह 11 बजे ग्राम-तमनार, तहसील-तमनार, जिला-रायगढ़ में जनसुनवाई निर्धारित की गई है।

लेकिन सवाल यह है कि क्या यह जनसुनवाई वास्तव में जनता की आवाज सुनने का मंच है या केवल एक औपचारिक प्रक्रिया। हालात यह संकेत दे रहे हैं कि बेदर्दी औद्योगिक विकास से रायगढ़ की सांस छीन रहे हैं और यह जनसुनवाई अब जबरदस्ती की औपचारिकता बनकर रह गई है। क्षेत्र पहले ही कोल माइंस, डोलोमाइट खदानों और क्रशर इकाइयों के कारण प्रदूषण की मार झेल रहा है, और अब इस नए विस्तार से स्थिति और भयावह होने की आशंका है।

तमनार और आसपास के गांवों में पहले से ही हवा और पानी की गुणवत्ता गिर चुकी है। स्थानीय लोगों में सांस, त्वचा और अन्य बीमारियों के मामले बढ़ रहे हैं, वहीं खेती और जल स्रोत भी बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। इसके बावजूद प्रशासनिक और औद्योगिक तंत्र लगातार विस्तार की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि पर्यावरणीय संतुलन से अधिक प्राथमिकता आर्थिक लाभ को दी जा रही है।

छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा जारी सूचना में मैसर्स शांभवी इस्पात प्राइवेट लिमिटेड के स्टील प्लांट विस्तार का प्रस्ताव रखा गया है। इसमें 2×350 टीपीडी डीआरआई किल्न, 2×10 मेगावाट पावर प्लांट, 1×10 मेगावाट एफबीसी पावर प्लांट, 1×9 एमवीए फेरो एलॉय यूनिट और अन्य उत्पादन इकाइयों के विस्तार का उल्लेख किया गया है।

21 अप्रैल को तमनार में प्रस्तावित जनसुनवाई को लेकर स्थानीय लोगों में असंतोष है। उनका आरोप है कि यह प्रक्रिया पहले से तय परिणामों को वैधता देने का माध्यम बन चुकी है, जहां वास्तविक विरोध को दबाने और समर्थन दिखाने के लिए प्रायोजित भीड़ का सहारा लिया जाता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / रघुवीर प्रधान

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