बारिश में हर बूंद की सुरक्षा, पेयजल गुणवत्ता पर चौकस नजर

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बारिश में हर बूंद की सुरक्षा, पेयजल गुणवत्ता पर चौकस नजर


धमतरी, 02 सितंबर (हि.स.)। मानसून में बारिश और जलभराव के चलते पेयजल स्रोतों के दूषित होने की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे में ग्रामीण परिवारों तक पहुंचने वाला पानी पर्याप्त होने के साथ-साथ स्वच्छ और सुरक्षित भी रहे, इसके लिए धमतरी जिले में पेयजल गुणवत्ता की निगरानी को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है।

कलेक्टर अबिनाश मिश्रा के निर्देश पर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा मानसून अवधि में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत पेयजल स्रोतों की नियमित निगरानी, आवश्यकतानुसार क्लोरीनेशन, जल टंकियों की सफाई, ग्राम स्तर पर जल परीक्षण और प्रयोगशालाओं में घरेलू जल नमूनों की जांच की जा रही है। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में 9,981 हैंडपंप और 16,024 पेयजल स्रोतों के साथ 548 जल टंकियां पेयजल व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनकी नियमित निगरानी और रखरखाव के जरिए सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। जल जीवन मिशन के तहत जल के डिसइंफेक्शन के लिए जिले में 529 क्लोरिनेटर मशीनें उपलब्ध हैं।

वहीं 718 नल जल योजनाएं और दो समूह जल प्रदाय योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण परिवारों तक नल के जरिए पानी पहुंचाया जा रहा है। गांव की जल बहिनियां बनीं गुणवत्ता की प्रहरी—पेयजल निगरानी में ग्रामीण समुदाय की भागीदारी भी सुनिश्चित की गई है। जिले के 623 गांवों में फील्ड टेस्ट किट (एफटीके) उपलब्ध कराई गई है तथा प्रत्येक गांव में पांच जल बहिनियों को जल परीक्षण के लिए प्रशिक्षित किया गया है। इस तरह 3,110 जल बहिनियां ग्राम स्तर पर पानी की गुणवत्ता की निगरानी कर रही हैं। वे विभिन्न पेयजल स्रोतों से नमूने लेकर एफटीके माध्यम से प्राथमिक जांच करती हैं, जिससे संभावित समस्या की शुरुआती स्तर पर पहचान हो सके। मानसून के दौरान जिले के चारों विकासखंड कुरूद, मगरलोड, धमतरी और नगरी से हर सप्ताह घरेलू जल के नमूने लिए जा रहे हैं। प्रत्येक विकासखंड से 30-30, यानी कुल 120 नमूने प्रत सप्ताह जांच के लिए भेजे जाते हैं। इनका परीक्षण जिला स्तरीय प्रयोगशाला धमतरी तथा उपखंड स्तरीय प्रयोगशालाओं में किया जा रहा है। इसके साथ ही हर सप्ताह 15 जल टंकियों की निगरानी भी की जा रही है।

जल स्रोतों में आवश्यकतानुसार क्लोरीनेशन के साथ जल जीवन मिशन के तहत निर्मित टंकियों की नियमित सफाई और रखरखाव सुनिश्चित किया जा रहा है। 529 क्लोरिनेटर मशीनों के माध्यम से सक्रिय क्लोरीन तैयार कर निर्धारित मात्रा में जलापूर्ति प्रणाली में शामिल किया जाता है, जिससे संभावित रोगजनक सूक्ष्मजीवों को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। मानसून में दूषित पानी से डायरिया, हैजा, टाइफाइड, पेचिश तथा हेपेटाइटिस-ए और ई जैसे जलजनित रोगों का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में समय पर जांच, क्लोरीनेशन और जल टंकियों की सफाई रोगों के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। प्रशासन ने नागरिकों से पेयजल स्रोतों के आसपास स्वच्छता बनाए रखने, कचरा व गंदा पानी जमा नहीं होने देने तथा जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाने में सहयोग की अपील की है। पानी के रंग, गंध या स्वाद में असामान्य परिवर्तन होने पर इसकी सूचना ग्राम पंचायत या संबंधित विभागीय अमले को देने कहा गया है। स्रोत से घर तक सुरक्षित पानी पहुंचाने की इस बहुस्तरीय व्यवस्था का उद्देश्य स्पष्ट है—हर ग्रामीण परिवार को स्वच्छ, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध कराना।

हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा

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