राष्ट्रपति भवन के स्वतंत्रता दिवस निमंत्रण में बस्तर की ढोकरा कला और अमर प्रेमगाथा 'झिटकू-मिटकी' के प्रतीक को स्थान

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राष्ट्रपति भवन के स्वतंत्रता दिवस निमंत्रण में बस्तर की ढोकरा कला और अमर प्रेमगाथा 'झिटकू-मिटकी' के प्रतीक को स्थान


रायपुर, 05 अगस्त (हि.स.)। स्वतंत्रता दिवस 2026 के अवसर पर राष्ट्रपति भवन के 'एट होम' आधिकारिक निमंत्रण पत्र पर छत्तीसगढ़ के बस्तर की प्रसिद्ध पारंपरिक ढोकरा कला और लगभग 300 वर्ष पुरानी अमर प्रेमगाथा 'झिटकू-मिटकी' के प्रतीक को स्थान मिला है, जो बस्तर की जनजातीय संस्कृति के लिए एक ऐतिहासिक राष्ट्रीय सम्मान है।

वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा है कि यह कलात्मक आकृति बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर मिली विशिष्ट पहचान का प्रतीक है। यह प्रत्येक छत्तीसगढ़वासी के लिए गर्व और आत्मसम्मान का विषय है।

वन मंत्री केदार कश्यप ने आज कहा कि बस्तर की सांस्कृतिक धरोहर आज राष्ट्रीय पहचान प्राप्त कर रही है। झिटकू–मिटकी की लोकगाथा सदियों से बस्तर के जनजीवन, लोकआस्था और सांस्कृतिक चेतना का अभिन्न हिस्सा रही है। राष्ट्रपति भवन के स्वतंत्रता दिवस निमंत्रण में इस प्रतीक का स्थान मिलना प्रत्येक बस्तरवासी और छत्तीसगढ़वासी के लिए गर्व का क्षण है।

उन्होंने कहा कि लगभग 300 वर्ष पुरानी झिटकू–मिटकी की अमर प्रेमगाथा केवल प्रेम और समर्पण की कथा नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की परंपराओं, सामाजिक मूल्यों और सांस्कृतिक पहचान का जीवंत प्रतीक है। यही कारण है कि बस्तर की प्रसिद्ध ढोकरा (बेल मेटल) कला में झिटकू–मिटकी की प्रतिमाएँ विशेष स्थान रखती हैं और वर्षों से सम्मान-चिह्न के रूप में भेंट की जाती रही हैं।

मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि हाल ही में राष्ट्रपति भवन में आयोजित विशेष कार्यक्रम के दौरान भी छत्तीसगढ़ की ओर से झिटकू–मिटकी की पारंपरिक ढोकरा कलाकृति राष्ट्रपति को भेंट की गई थी। अब उसी प्रतीक का स्वतंत्रता दिवस के आधिकारिक निमंत्रण पत्र में उपयोग इस बात का प्रमाण है कि बस्तर की लोककला और जनजातीय संस्कृति देश की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में स्थानीय संस्कृति, जनजातीय परंपराओं और भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत को सम्मान और पहचान देने का कार्य निरंतर हो रहा है। वहीं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार भी बस्तर की संस्कृति, लोककला और जनजातीय परंपराओं को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुँचाने के लिए सतत प्रयासरत है। यह प्रत्येक छत्तीसगढ़वासी के लिए गर्व और आत्मसम्मान का विषय है।

हिन्दुस्थान समाचार / केशव केदारनाथ शर्मा

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