पीएम आवास निर्माण में गुणवत्ता पर सवाल, निर्माण के दौरान धंस गई छत
धमतरी, 08 अक्टूबर (हि.स.)। जरूरतमंद परिवारों को आवास उपलब्ध कराने के लिए शासन की ओर से प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकानों का निर्माण कराया जा रहा है। नगर पंचायत नगरी में भी 100 से अधिक पीएम आवास निर्माणाधीन हैं, लेकिन कुछ आवासों के निर्माण में गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हितग्राहियों ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की है।
नगर पंचायत के वार्ड क्रमांक 12 में रूपल छाजेड़ के पीएम आवास की छत ढलाई के तीन-चार दिन बाद क्षतिग्रस्त हो गई। इससे हितग्राही की चिंता बढ़ गई है। उन्होंने निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराने और क्षतिग्रस्त छत को दोबारा बनवाने की मांग की है। वार्ड निवासी बबलू साहू ने भी पीएम आवासों के निर्माण में गुणवत्ता की जांच कराने की जरूरत बताई है। उनका कहना है कि गरीब हितग्राहियों के लिए बनाए जा रहे मकानों में निर्माण सामग्री और तकनीकी गुणवत्ता की नियमित जांच होनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की दुर्घटना की स्थिति न बने। 100 से अधिक आवास निर्माणाधीन नगर पंचायत से प्राप्त जानकारी के अनुसार नगरी में वर्तमान में करीब 100 पीएम आवासों का निर्माण कार्य प्रगति पर है। इनमें से कुछ हितग्राहियों द्वारा निर्माण की गुणवत्ता को लेकर शिकायत किए जाने की बात सामने आई है। ऐसे में निर्माणाधीन आवासों की तकनीकी गुणवत्ता की जांच को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
लोगों का कहना है कि आवास निर्माण में इंजीनियर और सब-इंजीनियर की भूमिका तय होने के बावजूद यदि निर्माण की गुणवत्ता की नियमित जांच नहीं होती है तो हितग्राहियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण होगा। लोगाें ने पीएम आवास निर्माण की गुणवत्ता को लेकर उठ रही शिकायतों के बीच जिम्मेदारी और निगरानी की व्यवस्था को लेकर भी स्थिति स्पष्ट किए जाने की मांग की है।
हितग्राही रूपल छाजेड़ के अनुसार जिस दिन उनके आवास की छत की ढलाई की गई, उस दिन वह स्वास्थ्य परीक्षण के लिए धमतरी गई थीं। शाम को वापस लौटने पर उन्होंने छत में दरार देखी। उनका कहना है कि उन्होंने ठेकेदार से छत दोबारा बनाने को कहा, लेकिन ठेकेदार ने कथित तौर पर उन्हें चुप रहने और निर्माण कार्य में सलाह नहीं देने की बात कही। इसके बाद दरार वाले हिस्से पर सीमेंट की एक परत लगाकर उसे ठीक करने का प्रयास किया गया।
हितग्राही का कहना है कि छत की स्थिति को देखते हुए उन्हें भविष्य में हादसे की आशंका बनी हुई है। उन्होंने क्षतिग्रस्त छत को तोड़कर दोबारा ढलाई कराने की मांग की है।
इस संबंध में नगर पंचायत नगरी के सीएमओ यशवंत कुमार वर्मा ने कहा कि नगर पंचायत का काम हितग्राही को शासन द्वारा स्वीकृत आवास की राशि का भुगतान समय पर करना है। हितग्राही किस ठेकेदार से निर्माण कार्य करा रहा है, इसकी गुणवत्ता जांच की जिम्मेदारी नगर पंचायत की नहीं है।
हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा

