कांकेर जिले में लगातार सक्रिय भालुओं के आतंक से लोग दहशत में

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कांकेर जिले में लगातार सक्रिय भालुओं के आतंक से लोग दहशत में


कांकेर, 13 अगस्त (हि.स.)। जिले में इन दिनों भालुओं के आतंक से लोग दहशत में है। ताजा मामला अलबेलापारा वार्ड से सामने आया है, जहां बीती रात में दो वन्य प्राणी भालू घर में घुसकर बाहर जाते हुए सीसीटीवी में कैद हो गए। सामने आए वीडियो में देखा जा सकता है कि दो भालू घर का मेन गेट पार करते हैं, जिन्हें कुत्तों का झुंड घेर लेता है, इसके बाद दोनों भाग जाते हैं। बताया जा रहा है कि अलबेलापारा वार्ड में रोजाना भालू पहुंच रहे हैं और तोड़-फोड़ करके उत्पात मचा रहे हैं। रिहायशी इलाकों में लगातार सक्रिय भालुओं के आतंक से लोग दहशत में हैं। विदित हाे कि नरहरपुर वन परिक्षेत्र अंतर्गत मरकाटोला–लारगांव क्षेत्र में 5 अगस्त को भालू के हमले की घटना सामने आई थी, हमले में तीन की मौत हो गई थी, इस घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है।

शहर से सटे गोविंदपुर में भी भालू भोजन की तलाश में आधी रात घरों के दरवाजे तोड़कर अंदर घुस रहे है। पिछले चार रातों में 9 मकानों के दरवाजे तोड़ चुका है। गोविंदपुर की कविता यादव ने बताया कि मैं बच्चों के साथ घर पर अकेली थी। बुधवार रात 2.30 जोर से आवाज आई। मैं जागी। देखा भालू दरवाजा तोड़कर अंदर आ गया था, मैं अंदर भागी। बच्चे के साथ स्वयं को बेडरूम में बंद कर लिया। भालू किचन में घुसकर राशन खा गया। सामने रहने वाले रॉकी ठाकुर को फोन लगाया, उन्होंने बाहर से देखा, कमरे में भालू घूम रहा था। एक अन्य मामले में गोविंदपुर की द्रोपती ठाकुर ने बताया कि घर में घुसकर भालू ने हमला किया, मैं गिर गई, फिर उठकर भागी, कमरे में खुद को बंद किया। सामने वाले कमरे में सोए बेटे को आवाज लगाई, दरवाजा बंद कराया। गोविंदपुर की श्रद्धा चंद्रवंशी ने कहा, बुधवार रात 1.30 बजे भालू आया। भगा दिया, दो बजे फिर आया, और दरवाजे की कुंडी तोड़ दी, मैं पांच फीट की दूरी पर सोई थी।

कांकेर के मुख्य वन संरक्षक विवेकानंद झा ने कहा कि लोगों को अनावश्यक रूप से जंगल में जाने से बचने और वन्यजीव दिखाई देने पर उनसे दूरी बनाए रखने की सलाह दी जा रही है। साथ ही मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए जागरूकता अभियान चला रहे हैं। उन्हाेने बताया कि वन्यजीवों के लिए भोजन की उपलब्धता बढ़ाने और पानी के स्रोतों को विकसित व सुरक्षित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। जंगल में पर्याप्त संसाधन मिलने से वन्यजीवों के आबादी वाले इलाकों में आने की संभावना कम होगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे

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