पद्म विभूषण डाॅ. तीजन बाई का निधन छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को अपूरणीय क्षति : केदार कश्यप

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पद्म विभूषण डाॅ. तीजन बाई का निधन छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को अपूरणीय क्षति : केदार कश्यप


रायपुर 05 जुलाई (हि.स.)। छत्तीसगढ़ के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने पंडवानी की महान साधिका एवं पद्म विभूषण से सम्मानित श्रद्धेय डाॅ. तीजन बाई के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक और लोककलात्मक परंपरा के लिए अपूरणीय क्षति है।

मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि तीजन बाई ने अपनी अद्भुत प्रतिभा, साधना और अथक परिश्रम के बल पर छत्तीसगढ़ की लोकगायन परंपरा 'पंडवानी' को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाई। उन्होंने अपने जीवनभर लोक संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन का कार्य किया तथा अपनी कला के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को विश्व पटल पर सम्मान दिलाया। उनका योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा।

उन्होंने कहा कि विषम परिस्थितियों में भी तीजन बाई ने अपनी कला-साधना का मार्ग नहीं छोड़ा। उनका जीवन संघर्ष, समर्पण और सांस्कृतिक गौरव का प्रेरणादायी उदाहरण है। आने वाली पीढ़ियों को उनके जीवन और साधना से प्रेरणा लेकर अपनी लोक संस्कृति एवं विरासत को संजोने और आगे बढ़ाने का संकल्प लेना चाहिए।

केदार कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी तीजन बाई के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उनका जाना छत्तीसगढ़ की उस अमूल्य विरासत का खो जाना है, जिसने प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

वनमंत्री केदार कश्यप ने ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोकाकुल परिजनों, असंख्य प्रशंसकों एवं कला जगत को इस असहनीय दुःख को सहने की शक्ति दें। उन्होंने श्रद्धेय तीजन बाई को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनकी कला, उनकी साधना और उनका योगदान सदैव अमर रहेगा तथा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देता रहेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / गेवेन्द्र प्रसाद पटेल

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