गुरु गोविंद सिंह के जन्मोत्सव पर निकला नगर-कीर्तन, समाजजनों में उत्साह
धमतरी, 03 जनवरी (हि.स.)। सिखों के 10 वें गुरु गुरु गोविंद सिंह के प्रकाशोत्सव पर शनिवार को सिख समाज द्वारा आकर्षक नगर कीर्तन (शोभायात्रा) निकाली गई। आयोजन में सिख समाज का उत्साह देखते ही बना। गुरूसिंग सभा भवन से शनिवार शाम को नगर कीर्तन निकला। यह शोभायात्रा नगर भ्रमण के बाद वापस गुरूसिंग सभा भवन लौटी।
सिख समाज में गोविंद सिंह जी के प्रकाश पूरब (जयंती) को लेकर खासा उत्साह रहता है। गुरु के सम्मान में सप्ताह भर पहले से ही विविध कार्यक्रम आयोजित होने शुरू हो जाते हैं, जिसके तहत हर दिन सुबह प्रभातफेरी निकाली गई। इस आयोजन में समाज के द्वारा गुरु के अमर उपदेशों को गुरु वाणी के रूप में भजन कीर्तन के माध्यम से जन जन तक पहुंचाया गया। मालूम हो कि सप्ताहभर से गुरुद्वारे में प्रतिदिन शबद कीर्तन के कार्यक्रम हो रहे हैं, जिसमें गुरु की आराधना की जा रही है। गुरूसिंग सभा हाल में सोमवार सुबह से ही शबद कीर्तन का दौर शुरू हो गया। 10 बजे से ही कलाकारों ने गुरु के वचनों का संगीत के माध्यम से वर्णन किया। प्रकाश पर्व के अवसर पर नगर कीर्तन गुरु सिंह सभा हाल से निकली जो गोल बाजार, मठ मंदिर चौक, कचहरी चौक होते हुए गांधी चौक पहुंची। इसके बाद बनियापारा, शिव चौक, रिसाई पारा, नगर निगम स्कूल, रत्नाबांधा चौक से होते हुए वापस गुरु सिंग सभा हाल पहुंचकर संपन्न हुई। रास्ते भर पंच प्यारों के सम्मान में समाज की युवतियां सड़क को बुहारते हुए चल रही थी। दिन ढलने के बाद आकर्षक आतिशबाजी भी की गई। नगर कीर्तन को देखने लोगों की भीड़ लगी रही। मालूम हो कि गुरु गोबिंद सिंह के पिता सिख समाज के नौवें गुरु तेगबहादुर थे, जिनकी औरंगजेब ने हत्या करवा दी थी। उसके बाद मात्र नौ साल की उम्र में गोबिंद सिंह गुरु बन गए। बाद में उन्होंने गुरु ग्रंथ साहिब को सबसे बड़ा गुरु घोषित किया और खालसा पंथ की स्थापना की।
सिख समाज के अध्यक्ष जगजीवन सिंघ सिध्दू, संरक्षक गुरूग्रंथ साहिब, सचिव जसपाल सिंघ छाबड़ा, मीत प्रधान रजिंदर सिंघ छाबड़ा, गुरप्रती सिंघ मान, मनदीप सिंघ खनूजा, भूपेंद्र सिंघ तलूजा, गुरूमुख सिंघ खनूजा, बलजीत सिंघ गिल, प्रिंस सिंह छाबड़ा सहित अन्य लोग शामिल थे।
हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा

