मंत्री केदार कश्यप ने साहित्यकाराें के सम्मान के साथ, तीन किताबों का किया विमोचन

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मंत्री केदार कश्यप ने साहित्यकाराें के सम्मान के साथ, तीन किताबों का किया विमोचन


जगदलपुर, 08 जून (हि.स.)। छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, जनजातीय परंपराओं और साहित्यिक विरासत को नई पहचान देने वाली तीन पुस्तकों का विमोचन वन मंत्री केदार कश्यप ने आज साेमवार काे किया। कार्यक्रम में साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में योगदान देने वाले लेखकों, साहित्यकारों का सम्मान भी हुआ। इस दााैरान छत्तीसगढ़ी साहित्यकार डॉ. गीतेश अमरोहित सरस्वती बुक्स के प्रकाशक आकाश महेश्वरी मौजूद रहे।

केदार कश्यप ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण होता है। जनजातीय संस्कृति, लोक परंपराओं, ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण में लेखकों की भूमिका अहम है। उन्होंने कहा कि ऐसी पुस्तकें वर्तमान पीढ़ी को जड़ों से जोड़ती हैं। आने वाली पीढ़ियों के लिए भी ज्ञान का स्रोत बनती हैं। कार्यक्रम में बस्तर के वरिष्ठ साहित्यकार रुद्रनारायण पाणिग्रही को धुरवा पटका भेंटकर साहित्य लेखन, लोक संस्कृति के संरक्षण में योगदान के लिए स्मृति-चिह्न प्रदान किया गया। इसे साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में उनके लंबे समय के काम की सराहना बताया गया। वन मंत्री केदार कश्यप ने इस मौके पर रुद्रनारायण पाणिग्रही की पुस्तक 'बस्तर की लोक संस्कृति' का विमोचन किया। पुस्तक में बस्तर की सांस्कृतिक परंपराओं, लोक मान्यताओं, रीति-रिवाजों, सामाजिक जीवन का विस्तृत वर्णन है। केदार कश्यप ने डॉ. संजय अलंग की पुस्तक 'छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प परंपरा एवं संस्कृति' का भी विमोचनकिया। डॉ. भागेश्वर पात्र की पुस्तक 'हल्बा जनजाति' भी जारी की गई। रुद्रनारायण पाणिग्रही ने कहा कि बस्तर की संस्कृति और परंपराओं को व्यापक स्तर पर पहुंचाना उनका उद्देश्य रहा है। मौजूद साहित्यकारों ने ऐसे आयोजनों को साहित्य, संस्कृति के संवर्धन के लिए जरूरी बताया। कार्यक्रम में साहित्य, संस्कृति, जनजातीय जीवन पर आधारित पुस्तकों की उपयोगिता पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि बस्तर और छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं को दस्तावेजी रूप देने का काम साहित्यकार लगातार कर रहे हैं। यह समाज और शोधकर्ताओं के लिए उपयोगी है।

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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे

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