अंबिकापुर : सरगुजा का 'मिनी गोवा' बना मौत का वाटरफॉल, लिब्रा में आज फिर डूबी एक और जिंदगी

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अंबिकापुर, 16 मई (हि.स.)। भीषण गर्मी से राहत पाने और मौज-मस्ती के नाम पर सरगुजा जिले के प्रसिद्ध लिब्रा वाटरफॉल पहुंचने वाले सैलानियों के लिए यह पर्यटन स्थल अब काल साबित हो रहा है। आज शनिवार को लिब्रा वाटरफॉल में नहाने के दौरान डूबने से एक और युवक की मौत हो गई। गर्मी के इस सीजन में अंबिकापुर शहर के नजदीक स्थित इस पर्यटन स्थल पर डूबने की यह तीसरी बड़ी घटना है, जिसने स्थानीय प्रशासन के सुरक्षा दावों की पोल खोलकर रख दी है।

मिली जानकारी के अनुसार, बतौली थाना क्षेत्र के ग्राम पोकसरी निवासी इंद्रदेव पैकरा (पिता संजय पैकरा) अपने 5 साथियों के साथ लिब्रा वाटरफॉल घूमने और नहाने पहुंचा था। इसी दौरान नहाते समय उसका पैर फिसल गया और वह गहरे पानी में चला गया। साथियों ने उसे बचाने की काफी कोशिश की, लेकिन गहराई अधिक होने के कारण वे उसे बाहर नहीं निकाल सके। बाद में स्थानीय लोगों की मदद से युवक को पानी से बाहर निकाला गया। बताया जा रहा है कि तब तक उसकी सांसें चल रही थीं। साथी उसे तत्काल मेडिकल कॉलेज अस्पताल, अंबिकापुर लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।

सुरक्षा के इंतजाम शून्य, हाथ पर हाथ धरे बैठा प्रशासन

हैरान करने वाली बात यह है कि, लिब्रा वाटरफॉल में सुरक्षा के नाम पर दूर-दूर तक कोई इंतजाम नहीं हैं और लगातार हो रही मौतों के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। हर बार जब कोई हादसा होता है, तो प्रशासन की अस्थायी रूप से आंख खुलती है, कागजी कार्रवाई होती है, और फिर स्थिति जस की तस हो जाती है। गर्मियों के दिनों में इस वाटरफॉल में रोजाना काफी संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ती है। लोग परिवार और दोस्तों के साथ यहां मौज-मस्ती करने पहुंचते हैं, लेकिन पानी की गहराई और छिपे खतरों से अनजान होकर अपनी जान गंवा बैठते हैं।

हादसों का पुराना इतिहास

लिब्रा वाटरफॉल में लापरवाही और मौतों का यह सिलसिला नया नहीं है, बल्कि प्रशासनिक अनदेखी का यहाँ एक लंबा इतिहास रहा है। इससे पूर्व 15 जून 2023 को भी यहाँ एक दर्दनाक हादसा हुआ था, जब नमनाकला निवासी 18 वर्षीया अंजलि बखला अपने परिवार के साथ घूमने आई थी और नहाने के दौरान पैर फिसलने से गहरे पानी में डूब गई थी। स्थानीय लोगों की मदद से उसे अस्पताल तो पहुंचाया गया, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। उस दौरान वाटरफॉल में शराबखोरी, हुड़दंग और दो गुटों में मारपीट की शिकायतें भी आम थीं।

घटना के बाद तत्कालीन प्रशासन ने बांस के अस्थायी बैरिकेड्स लगाकर इस स्थल को बंद कर दिया था। तब तत्कालीन एसडीओपी अखिलेश कौशिक ने बयान जारी कर कहा था कि सुरक्षा की दृष्टि से लिब्रा वाटरफॉल को लोगों के लिए बंद कराया गया है, क्षेत्र में लगातार गश्त की जा रही है और भविष्य में उच्चाधिकारियों के निर्देश पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। लेकिन यह कार्रवाई सिर्फ एक दिखावा साबित हुई, क्योंकि कुछ महीनों बाद बिना किसी पुख्ता और स्थायी सुरक्षा इंतजामों के इस प्रतिबंध को दोबारा हटा दिया गया।

अस्थायी सख्ती बनाम स्थायी लापरवाही

प्रशासन की इसी ढर्रे पर चलने वाली कार्यप्रणाली का नतीजा था कि ठीक एक साल बाद, 29 मई 2024 को एक बार फिर इस वाटरफॉल ने एक और जान ले ली। अंबिकापुर के गांधीनगर क्षेत्र का निवासी अनू द्विवेदी अपने दोस्तों के साथ यहां नहाने आया था और धुनधूटा नदी डैम के इस गहरे हिस्से में डूबने से उसकी मौत हो गई। उस वक्त भी पुलिस की तैनाती के दावे किए गए थे, लेकिन जमीनी हकीकत यह थी कि सुरक्षा के कोई ठोस उपाय नहीं किए गए, जिससे पुलिस और जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े हुए थे।

आज 2026 में एक बार फिर उसी स्थान पर हुई इस युवक की मौत ने यह साबित कर दिया है कि प्रशासन केवल हादसों के बाद जागता है और कुछ दिनों की 'अस्थायी सख्ती' दिखाकर अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ लेता है। यदि समय रहते जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने सुरक्षा के ठोस व स्थायी उपाय- जैसे गहरे पानी के क्षेत्रों में स्थायी लोहे की बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड, लाइफगार्ड्स की तैनाती और हुड़दंगियों पर सख्त कार्रवाई- नहीं की, तो 'सरगुजा के गोवा' के नाम से मशहूर इस मिनी वाटरफॉल में ऐसे ही मासूमों की जानें जाती रहेंगी और प्रशासन सिर्फ मर्ग कायम कर जांच की औपचारिकता पूरी करता रहेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / पारस नाथ सिंह

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