शारदीय नवरात्रि में हाथी पर सवार होकर आएंगी माता रानी, पंडित अतुल कृष्ण द्विवेदी ने बताया शुभ संकेत

WhatsApp Channel Join Now
शारदीय नवरात्रि में हाथी पर सवार होकर आएंगी माता रानी, पंडित अतुल कृष्ण द्विवेदी ने बताया शुभ संकेत


जांजगीर चांपा, 05 अक्टूबर (हि. स.)। शारदीय नवरात्रि का पर्व इस वर्ष 11 अक्टूबर 2026 से शुरू होकर 20 अक्टूबर तक चलेगा। नवरात्रि में मां दुर्गा के आगमन और विदाई की सवारी का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार माता रानी की सवारी का निर्धारण नवरात्रि की शुरुआत और समापन के दिन के आधार पर किया जाता है। इस बार नवरात्रि की शुरुआत रविवार से होने के कारण माता रानी हाथी पर सवार होकर आएंगी।

पंडित अतुल कृष्ण द्विवेदी के अनुसार, हाथी की सवारी को शुभ माना जाता है। यह ज्ञान, ऐश्वर्य, सुख और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता का हाथी पर आगमन अच्छी वर्षा और उत्तम फसल के संकेत देता है। माता की सवारी हर वर्ष अलग हो सकती है और इसका निर्धारण वार के अनुसार किया जाता है।

पंडित द्विवेदी ने बताया कि हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष में चार नवरात्रि आती हैं, जिनमें दो प्रत्यक्ष और दो अप्रत्यक्ष नवरात्रि मानी जाती हैं। आश्विन माह में आने वाली नवरात्रि को शारदीय नवरात्रि कहा जाता है। यह प्रत्यक्ष नवरात्रि है और देशभर में इसे उत्सव के रूप में धूमधाम से मनाया जाता है। नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है।

पंडित अतुल कृष्ण द्विवेदी के अनुसार शारदीय नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती के पाठ का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता है कि विधि-विधान और उचित समय पर दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से माता रानी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इससे नौकरी, संतान, भूमि, भवन और वाहन सहित विभिन्न मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना की जाती है।

नवरात्रि के पहले दिन ज्योति कलश प्रज्वलित करने के लिए सूर्योदय के बाद का समय शुभ माना जाता है। सामान्य रूप से सुबह 6 बजे से 8 बजे के बीच का समय कलश स्थापना और दीप प्रज्वलन के लिए उपयुक्त माना जाता है। इसके अलावा सुबह का समय निकल जाने पर अभिजीत मुहूर्त में भी ज्योति कलश प्रज्वलित किया जा सकता है। अभिजीत मुहूर्त सामान्यतः दोपहर 11:45 बजे से 12:40 बजे के आसपास माना जाता है। स्थानीय पंचांग के अनुसार मुहूर्त में थोड़ा अंतर हो सकता है।

हिन्दुस्थान समाचार / LALIMA SHUKLA PUROHIT

Share this story