पोला पर्व को लेकर सजा बाजार, खूब बिके नांदिया बैल और मिट्टी के खिलौने

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पोला पर्व को लेकर सजा बाजार, खूब बिके नांदिया बैल और मिट्टी के खिलौने


नांदिया बैल, पोरा-जांता, दीया और लकड़ी के खिलौनों की रही मांग

धमतरी, 09 सितंबर (हि.स.)। छत्तीसगढ़ के पारंपरिक और कृषि संस्कृति से जुड़े पोला पर्व को लेकर शहर में उत्साह का माहौल है। 10 सितंबर को मनाए जाने वाले इस पर्व के एक दिन पहले आज बुधवार को शहर के बाजारों में खरीदारों की भीड़ उमड़ पड़ी। घड़ी चौक, गोलबाजार, इतवारी बाजार और रामबाग क्षेत्र में मिट्टी के नांदिया बैल, पोरा-जांता, दीया सहित रंग-बिरंगे मिट्टी के खिलौनों की दुकानों पर दिनभर चहल-पहल रही।

सप्ताहभर से चल रही खरीदारी ने पर्व के पहले बाजार को और गुलजार कर दिया। बच्चों से लेकर बड़ों तक अपनी पसंद के मिट्टी के खिलौने और बैल की जोड़ी खरीदते नजर आए। पोला पर्व खेती-किसानी और पशुधन के महत्व से जुड़ा है। कृषि कार्य में बैलों के योगदान के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए इस दिन पशुधन को स्नान कराकर सजाया जाता है और उनकी पूजा-अर्चना की जाती है। घरों में मिट्टी से बने नांदिया बैल तथा पोला के खिलौनों की भी पूजा करने की परंपरा है।

कुम्हारपारा के मूर्तिकार गगन कुंभकार और शिव कुंभकार ने बताया कि इस वर्ष मिट्टी के बैलों की जोड़ी 80 से 100 और 150 रुपये तक में बिक रही है। पोरा-जांता का सेट 100 से 150 रुपये तथा दीया 100 से 150 रुपये सैकड़ा की दर से उपलब्ध है। ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग पोला की सामग्री खरीदने धमतरी पहुंचे। बाजार में मिट्टी के खिलौनों के साथ लकड़ी से बने बैल और अन्य खिलौनों की भी मांग रही। भखारा क्षेत्र से पहुंची प्रेमबाई विश्वकर्मा ने बताया कि वह हर साल पोला पर्व के दौरान सामान बेचने धमतरी आती हैं। इस बार भी उन्होंने करीब सप्ताहभर से रामबाग क्षेत्र में पसरा लगाकर लकड़ी के खिलौने और बैलों की बिक्री की। उन्होंने बताया कि महंगाई के चलते इस वर्ष लकड़ी के बैलों की कीमत बढ़ी है। सामान्य बैल की एक जोड़ी करीब 80 रुपये में बिक रही है, जबकि डिजाइनर बैलों की कीमत 200 रुपये तक है। ग्राहक अपनी पसंद और बजट के अनुसार इनकी खरीदारी कर रहे हैं।

10 सितंबर काे पोला, 14 को तीजा और गणेश स्थापना

विप्र विद्वत परिषद के मीडिया सलाहकार पं. राजकुमार तिवारी ने बताया कि इस वर्ष 10 सितंबर, भाद्रपद कृष्ण पक्ष अमावस्या, गुरुवार को पोला पर्व मनाया जाएगा। वहीं 14 सितंबर सोमवार को हरितालिका तीज व्रत पर्व रहेगा और इसी दिन गणेश चतुर्थी पर गणेश स्थापना की जाएगी। उन्होंने बताया कि पोला पर्व खेती-किसानी के कार्यों से जुड़ा हुआ है। रोपाई और निदाई सहित प्रमुख कृषि कार्य पूरे होने के बाद भाद्रपद अमावस्या को यह पर्व मनाने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी समय धान की बालियों में दूध भरना प्रारंभ होता है और अन्नपूर्णा माता के गर्भ धारण करने की मान्यता भी जुड़ी है। खेती में सबसे अधिक योगदान देने वाले बैल को इस दिन विशेष रूप से सजाया-संवारा जाता है। मिट्टी से बने नांदिया बैल और पोला के खिलौनों की पूजा का भी विशेष विधान है। पर्व की तिथि का निर्धारण विप्र विद्वत परिषद के पंडितों द्वारा देव पंचांग के अनुसार किया गया है। परिषद ने लोगों से अपील की है कि निर्धारित तिथियों के अनुसार ही पर्व मनाएं और किसी प्रकार के भ्रम में न रहें।

हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा

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