गौरैया संरक्षण की मिसाल बना मंदरौद, कलेक्टर ने समाजसेवी मोहन साहू के अभियान को सराहा

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गौरैया संरक्षण की मिसाल बना मंदरौद, कलेक्टर ने समाजसेवी मोहन साहू के अभियान को सराहा


धमतरी, 11 जुलाई (हि.स.)। जिले के ग्राम मंदरौद में गौरैया और अन्य पक्षियों के संरक्षण के लिए वर्षों से चलाए जा रहे अनूठे अभियान को जिला प्रशासन का प्रोत्साहन मिला है। गांव प्रवास के दौरान समाजसेवी मोहन साहू ने शनिवार काे कलेक्टर अबिनाश मिश्रा से मुलाकात कर अपने अभियान की जानकारी दी।

कलेक्टर ने जनसहभागिता से संचालित इस पहल की सराहना करते हुए इसे जैव विविधता संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन की दिशा में प्रेरणादायी प्रयास बताया। मोहन साहू ने बताया कि अब तक 15 हजार से अधिक कृत्रिम आशियाने तैयार कर घरों, गलियों, विद्यालयों, खेल मैदानों, सार्वजनिक स्थलों और मुक्तिधाम सहित विभिन्न स्थानों पर लगाए जा चुके हैं, जिनमें बड़ी संख्या में गौरैया सहित अन्य पक्षियों ने बसेरा बनाया है। उन्होंने कहा कि अभियान का उद्देश्य केवल पक्षियों को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि लोगों में प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी है। इस दौरान उन्होंने मंदरौद को गौरैया गांव तथा गांव के प्रमुख चौक को गौरैया चौक के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव भी रखा, ताकि गौरैया संरक्षण का संदेश व्यापक स्तर तक पहुंचे और बच्चों व युवाओं में जैव विविधता के प्रति संवेदनशीलता बढ़े।

कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कहा कि बदलती जीवनशैली और तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण गौरैया जैसी पक्षी प्रजातियों का प्राकृतिक आवास लगातार प्रभावित हो रहा है। ऐसे समय में समाज की भागीदारी से किए जा रहे संरक्षण के प्रयास अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल शासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है और मोहन साहू का योगदान पूरे जिले के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि गौरैया सहित अन्य पक्षियों के लिए हजारों कृत्रिम आशियाने तैयार कर सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने का कार्य अनुकरणीय है, जो पर्यावरण संरक्षण के साथ नई पीढ़ी में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता भी विकसित करता है। कलेक्टर ने यह भी सुझाव दिया कि गांव के प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर जवानों के चित्र और प्रेरक संदेश भी प्रदर्शित किए जाएं, ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ बच्चों और युवाओं में राष्ट्रभक्ति, सामाजिक जिम्मेदारी और सकारात्मक नागरिक मूल्यों का भी विकास हो। उन्होंने विश्वास जताया कि मंदरौद को गौरैया गांव के रूप में विकसित करने की पहल पर्यावरण संरक्षण का एक प्रेरक मॉडल बनेगी और प्रशासन ऐसे जनहितकारी एवं रचनात्मक प्रयासों को आगे भी निरंतर प्रोत्साहित करता रहेगा।

हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा

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