मखाना उत्पादन से बढ़ेगी किसानों की आय, धमतरी में 40 महिला कृषकों को दिया गया वैज्ञानिक प्रशिक्षण

WhatsApp Channel Join Now
मखाना उत्पादन से बढ़ेगी किसानों की आय, धमतरी में 40 महिला कृषकों को दिया गया वैज्ञानिक प्रशिक्षण


तालाबों के साथ खेतों में भी मखाना की खेती संभव, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन से महिलाओं के लिए खुलेंगे स्वरोजगार के नए अवसर

धमतरी, 04 नवंबर (हि.स.)। मखाना उत्पादन अब किसानों के लिए आय बढ़ाने का एक नया विकल्प बन सकता है।

इसकी खेती केवल तालाबों तक सीमित नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक तकनीक और उचित

प्रबंधन से खेतों में भी मखाना का उत्पादन किया जा सकता है। इसी संभावनाओं

को देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र, धमतरी में मखाना उत्पादन तकनीक एवं

प्रसंस्करण पर एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें

ग्राम पंचायत बोड़रा की सरपंच सुमन साहू मुख्य अतिथि के रूप में शामिल

हुईं।

प्रशिक्षण में जिले की 40 महिला कृषकों ने हिस्सा लेकर मखाना की

वैज्ञानिक खेती, उत्पादन, प्रसंस्करण और उद्यमिता से जुड़ी महत्वपूर्ण

जानकारियां प्राप्त कीं। मुख्य अतिथि सुमन साहू ने कहा कि मखाना की खेती

ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण और आत्मनिर्भरता का प्रभावी माध्यम बन

सकती है। कम भूमि और उपलब्ध जल संसाधनों का उपयोग कर इसे आयवर्धक गतिविधि

के रूप में विकसित किया जा सकता है। उन्होंने महिलाओं से प्रशिक्षण में

मिली जानकारी को अपने खेतों में अपनाने और दूसरी महिलाओं को भी इसके लिए

प्रेरित करने की अपील की। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रमुख डॉ. ईश्वर सिंह ने

बताया कि मखाना की खेती अब केवल तालाबों तक सीमित नहीं रह गई है। उपयुक्त

तकनीक और प्रबंधन के माध्यम से खेतों में भी इसका सफल उत्पादन संभव है।

धमतरी जिले में तालाबों, जलाशयों और आर्द्रभूमियों की उपलब्धता को देखते

हुए मखाना उत्पादन की अच्छी संभावनाएं हैं। इससे कृषि विविधीकरण को बढ़ावा

मिलने के साथ किसानों को आय का एक नया स्रोत मिल सकता है।

प्रशिक्षण के

दौरान वैज्ञानिक डॉ. दीपिका चंद्रवंशी ने मखाना उत्पादन के लिए उपयुक्त

जलवायु एवं भूमि, तालाब और खेत आधारित उत्पादन प्रणाली, उन्नत बीजों का

चयन, नर्सरी तैयार करने, पौध रोपण, फसल प्रबंधन, कटाई और बीज संग्रहण की

वैज्ञानिक विधियों की जानकारी दी। वैज्ञानिक डॉ. अमित कुमार सिन्हा ने

बीजों की सफाई, ग्रेडिंग, सुखाने, भूनने तथा पारंपरिक एवं यांत्रिक विधियों

से मखाना पॉपिंग की तकनीक समझाई। साथ ही तापमान और नमी नियंत्रण सहित

गुणवत्तापूर्ण उत्पाद तैयार करने की सावधानियों से अवगत कराया। वैज्ञानिक

डॉ. शक्ति वर्मा ने फसल में कीट एवं रोग प्रबंधन तथा संतुलित पोषण प्रबंधन

की जानकारी दी, वहीं प्रेमलाल साहू ने मखाना उत्पादन की क्षेत्रीय

संभावनाओं और जल प्रबंधन के महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला।

प्रशिक्षण

में बताया गया कि मखाना पोषण की दृष्टि से महत्वपूर्ण होने के साथ

व्यावसायिक संभावनाओं वाला कृषि उत्पाद भी है। इसकी खेती के साथ

प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन को जोड़कर ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे उद्यम

स्थापित किए जा सकते हैं। विशेष रूप से महिला स्व-सहायता समूह मखाना के

मूल्य संवर्धन से जुड़ी गतिविधियां संचालित कर अतिरिक्त रोजगार और आय

अर्जित कर सकते हैं। इस दौरान महिला कृषकों ने उत्पादन एवं प्रसंस्करण से

संबंधित तकनीकी समस्याओं पर विशेषज्ञों से चर्चा कर अपनी जिज्ञासाओं का

समाधान प्राप्त किया। कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा भविष्य में भी किसानों को

इस नवाचारी कृषि गतिविधि से जोड़ने के लिए प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन

और प्रायोगिक प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रम में वैज्ञानिक डॉ.

नेहा गॉडवे, रितिका ठाकुर, आशीष बंजारे सहित केंद्र के अन्य प्रतिनिधि एवं

जिले की 40 महिला कृषक उपस्थित रहीं।

हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा

Livevns.news Desk
Livevns.news Desk

772457 Articles

Share this story